बचपन
वन्दना पुणतांबेकर
(इंदौर)
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बचपन वहीं सुहाना था।
बचपन तो बस।
खुशियॉ का खजाना था।
खिल-खिलाती खुशियॉ, हरपल।
मौसम बड़ा सुहाना था।
कहॉ चाहतो का अफसाना था।
बचपन वही.......।
साथी, दोस्त वही पुराने थे।
बचपन के मीत सुहाने थे।
कहॉ अपना-पराया भेद जाना था।
कहॉ गमो का फ़साना था।
बचपन वही.........।
दादी के हाथों का लगता अचार सुहाना था।
पास जाकर कहानी सुनने का बहाना था।
दादा का मीठा स्वप्न सुहाना था।
कहॉ चिंताओं का फ़साना था।
बचपन वही..........।
छुट्टियों का अलग ही ज़माना था।
लड़ना-झगड़ना तकरारो का आना-जाना था।
लेकिन मन का निर्मल तराना था।
कहॉ राग-देश का फ़साना था।
यह भेद अब हमने जाना कि बचपन बड़ा सुहाना था।
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लेखिका परिचय :- नाम : वन्दना पुणतांबेकर
जन्म तिथि : ५.९.१९७०
लेखन विधा : लघुकथा, कहानियां, कविताएं, हायकू कविताएं, लेख,
शिक्षा : एम .ए फैशन डिजाइनिंग, आई म्यूज सितार,
प्रकाशित रचनाय...






















