माँ- एक सुखद अनुभूति
नील मणि
मवाना रोड, (मेरठ)
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चाँद तारों सा बचपन
चाँद तारे हो गया
मां जब से दूर हुई
बचपन खो गया
फ्रॉक से लेकर साड़ी
तक खूब सजाया तुमने
लाडली के हर आंसू पर
स्नेहांचल फैलाया तुमने
कुछ बन जाऊं मैं
रोज सवेरे जगाया तुमने
सफेद कोट बुन डॉ.
ख्वाबों में बनाया तुमने
कभी मलाई आम तो
कभी मालपुए का
स्वाद चखाया तुमने
हर क्षेत्र में प्रवीण हो
लाडली हर दांव
चलाया तुमने
जब भी उदास मन हुआ
शोहदों की शरारतों से
'देखने की चीज हो तुम'
कह विश्वास जगाया तुमने
अंजाने में दिए मेरे दुख को,
कण्ठ भी उतारा तुमने
अपनी परी के हर एहसास
को गले लगाया तुमने
नाज है मां तुम पर..
तुम्हारी स्नेहाशीष सीखों पर
आज आश्वस्त हूँ इसीलिए माँ,
मैं अपने आप पर।
परिचय :- नील मणि
निवासी : राधा गार्डन, मवाना रोड, (मेरठ)
घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौल...




















