ऑगन
मालती खलतकर
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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घर का ऑगन प्यारा-प्यारा
प्यारा-प्यारा न्यारा, न्यारा
इस ऑगन में चिडिया चहके
क्यारी-क्यारी फूल सजे
गुन-गुन ध्वनी से इन पर
मङराता भवरा लगे प्यारा।
ऑगन मे सजी रंगोली
स्वागत करती अतिथी का
रवि किरणो से स्वर्णिम हौता
ऑगन का कोना-कोना।
इस ऑगन मे नाचे बिटिया
बान्धे पायल पैरो मे
रूण् झुन रूण् झुन ध्वनि
गूंजती मा, बाबा के कानो मे।
आगन में अमराई बौराती
खटास भरी पवन झकौरो में।
इस ऑगन मे बैठ बङे
घर की शोभा है बढाते
अतीत की यादो में गुम हो
कभी खुशी कभी गम के
आंसू छलक जाते।
देखा है इस आँगन ने
सुख-दुख का रैला
कभी बिदाई बिटिया की
कभी महापर्पाण का बोझा
कभी विवाद कभी भाई मारत
कभी-कभी देखा है कंही
इस आँगन का बंटवारा।
यह आँगन है
सब देखता है
जब संध्या समय
तुलसी क्यारे में जलता है
दीपक प्यारा
आँगन को सजाने के लिए
अत...

















