दीप जलाएं बैठा हूं
आकाश सेमवाल
ऋषिकेश (उत्तराखंड)
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चकाचौंध की रौनक न मां,
दीप जलाएं बैठा हूं।
संगीत-गीत न तंत्र-मंत्र न,
जय माता दी कहता हूं।।
स्वर्ण कलश न स्वर्ण मूर्ति न,
न स्वर्णजड़ित सिंघासन है।
काष्ठ आड में रखा है तुझको,
जर्जर वस्त्र का आसन है।
नैवेद्य नहीं फल-फूल नहीं मां,
मैं गुड चढ़ाएं बैठा हूं।।
चकाचौंध की रौनक न मां,
दीप जलाएं बैठा हूं।
कर्पूर नहीं मां धूप नहीं,
न कर पाऊं श्रृंगार तेरा।
नूपुर नहीं, करधनी नहीं,
ना भोगने योग्य आहार तेरा।
इत्र नहीं, सिन्दूर नही मां,
सर झुकाए बैठा हूं।।
चकाचौंध की रौनक न मां,
दीप जलाएं बैठा हूं।
परिचय :- आकाश सेमवाल
पिता : नत्थीलाल सेमवाल
माता : हर्षपति देवी
निवास : ऋषिकेश (उत्तराखंड)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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