गरीबी अमीरी से जब
अरविन्द सिंह गौर
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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गरीबी अमीरी से
जब जुदा हो गई
गरीबी हुई खामोश तो
अमीरी खुदा हो गई।
गरीबी अमीरी से
जब जुदा हो गई।।
दुआएं बिकने लगी
अब बाजारों में
गरीबों को तो दुआ भी
अब बद्दुआ हो गई।
गरीबी अमीरी से
जब जुदा हो गई।।
आग और पानी का
कोई मेल नहीं लेकिन
आमिर के आगे वह भी
मरहवा हो गई।
गरीबी अमीरी से
जब जुदा हो गई।।
अमीरी की हवा ही
चली कुछ इस तरह
गरीबी की हवा
खुद हवा हो गई।
गरीबी अमीरी से
जब जुदा हो गई।।
गुनाहगार बचते रहे
सजाओ से
और बेगुनाहों को
सजा पर सजा हो गई।
गरीबी अमीरी से
जब जुदा हो गई।।
गरीबी भी याद आने लगी
उनको जब
अमीरी जब उनसे
खफा हो गई।
गरीबी अमीरी से
जब जुदा हो गई।।
"अरविंद" कहे ना कर तू घमंड
अपनी अमीरी पर इतना
वक्त के आगे वह भी
फना हो गई।
गरीबी अमीरी से
जब जुदा हो गई।।
परिचय :...

























