आर्यावर्त के सूर्य
डॉ. पंकजवासिनी
पटना (बिहार)
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हे आर्यावर्त के सूर्य!
तुम्हें क्या दीया दिखाऊँ!!
हे मानवता के दिव्य
उज्ज्वल रूप! बलिहारी जाऊँ।
दीन-हीन-पीड़ितों के हित
लहराय तुझ हिय में प्रखर
कैसी अप्रतिम उत्कट
सहानुभूति का अगाध सागर!
सादा जीवन जीया औ
सदा ही रखे उच्च विचार!
अपनी कथनी करनी से
दिखाय सदा उच्च संस्कार!!
साहस, संघर्ष, पौरुष के
साकार रूप रहे सदा तुम!
सदा ही किये चुनौतियों
मुश्किलों का सामना तुम!!
जीवन के पथ पर अनवरत
चलते अनथक राही तुम!
सतत् प्रेरणा के शुभ स्रोत
बने परम उत्साही तुम!!
बालकाल से ही जीया
अभावों का दूभर जीवन!
खेलने-खाने की उम्र से ही
करन लगे चिंतन-मनन!!
मांँ की ममता से भी वंचित,
हा महज आठ की वय में!
झेला विमाता का दुर्व्यवहार
औ पिता का धिक्कार!!
कैशोर वय में ही आ पड़ा
तेरे कोमल कंधों पर :
पूरे परिवार-पाल-पोस के
दायित्व...
























