बिटिया का बचपन
मालती खलतकर
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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बिटिया का बचपन सुन्दर था
पायल की रुनझुन थी
घर में हलचल थी।
आंगन मे तितली संग नाचती
बाबा के कंधो पर चढ जिद करती
मां से रुठती तो दादा को मनाती
लाडली बिटिया प्यारी परी सी।
घर, आंगन में शोर मचाती
कभी लजाती, कभी सकुचाती
डर कर पेडों के पीछे छुप जाती
सारे घर से, प्रश्न पुछती
कभी स्वंयम ही उत्तर देती।
मैं करुँगी, मैं कर दूंगी की रट लगाती
हठ मे जाने कब बचपन बीत गया
सयानी बिटिया सहमी सी रहने लगी
न जाने बचपन कहाँ खो गया।
परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से...



















