होली आई
आशीष तिवारी "निर्मल"
रीवा मध्यप्रदेश
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गीत खुशी के गाओ की होली आई
हंसो और हंसाओ की होली आई!
मौज मस्तियों का आलम है ऋतुओं,
गम सभी भुलाओ की होली आई।
बुरा ना मानो रंगों के इस त्योहार में
रुठे हुये को मनाओ की होली आई!
मिटाकर बीज नफरत बैर द्वेष के सब
खुशी के दीप जलाओ की होली आई!
भाईचारा अपनापन कायम रहे दिल
दिल से दिलमिलाओ की होली आई!
भुलाकर गिले शिकवे पुराने से पुराने
जी भर के मुस्कुराओ की होली आई!
परिचय :- कवि आशीष तिवारी निर्मल का जन्म मध्य प्रदेश के रीवा जिले के लालगांव कस्बे में सितंबर १९९० में हुआ। बचपन से ही ठहाके लगवा देने की सरल शैली व हिंदी और लोकभाषा बघेली पर लेखन करने की प्रबल इच्छाशक्ति ने आपको अल्प समय में ही कवि सम्मेलन मंच, आकाशवाणी, पत्र-पत्रिका व दूरदर्शन तक पहुँचा दीया। कई साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित युवा कवि आशीष तिवारी निर्मल वर्तम...






















