तू दोस्त बन
वीणा वैष्णव
कांकरोली
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तू दोस्त बन, या दुश्मन बन।
कुछ भी बन, चल जाएगा।।
भूल से भी, चमचा बना।
जीवन में, दुःख तू पाएगा।।
चमचे की, तुम बात न पूछो।
हर बर्तन, खाली कर जाएगा।।
जीवन में अगर, तुम्हारे आया।
जीवन नर्क, वह बना जाएगा।।
दूर ही रहना तुम, इन चमचों से।
यह किसी का, नहीं हो पाएगा।।
मीठी मीठी, बातें कर तुझसे।
राह भ्रमित, तुझे कर जाएगा।।
अपनों से दूर, तुझे वो कर।
करीब गैरों को, वो ले आएगा।।
अच्छे बुरे की, पहचान करना।
कौन तुम्हें, अब सिखलाएगा।।
विचारों को वो, तेरे गंदा कर।
जहर दिमाग, भर जाएगा।।
कहती वीणा, विवेक काम ले।
सदा चमचों से, तुम्हें बचाएगा।।
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परिचय : कांकरोली निवासी वीणा वैष्णव वर्तमान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय फरारा में अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। कवितायें लिखने में आपकी गहन रूचि है।
आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि हिंदी रक्षक...














