ये असमंजस क्यों ….?
छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
आनंद विहार (दिल्ली)
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ये भी चुप
वो भी चुप
ना विवाद
ना संवाद
समझें कैसे
मन की बात
रूठा कौन
किसे मनायें
समझाये कौन प्रिये
फिर मौन ये फैला क्यों...?
अनहद नाद
मन उन्माद
रूठे संवेदन
मूक स्पन्दन
सपन गढ़े
धड़कन बढ़े
हूक उठे
क़दम रुके
झुकी पलक प्रिये
फिर सन्नाटा ये पसरा क्यों....?
यौवन श्रृंग
मन उमंग
बिजुरी चमके
तन तरंग
बिना भंग
मन मलंग
कैसी जंग
रंग में भंग
मन मदमाये प्रिये
मगर धूप ये चुप क्यों....?
कैसी उलफ़त
नहीं शरारत
ना ही नफ़रत
कैसी हिमाक़त
ना ही शिकवा
कहाँ शिकायत
गुज़र गई रात
बनी नहीं बात
भोर सुहानी हाय प्रिये
फिर फ़िज़ा ये ख़ामोश क्यों...?
परिचय :- छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
निवासी : आनंद विहार, दिल्ली
विशेष रूचि : व्यंग्य लेखन, हिन्दी व राजस्थानी में पद्य व गद्य दोनों विधा में लेखन,...


















