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पद्य

श्रेष्ठ हमारी हिन्दी है
कविता

श्रेष्ठ हमारी हिन्दी है

राजीव रावत भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में सम्मिलित रचना करोड़ो लोंगो की मधुर भाषा, यह प्यारी-प्यारी हिन्दी है विश्व पटल की पांच भाषाओं में, श्रेष्ठ एक हमारी हिन्दी है १० जनवरी ७४ को नागपुर में, इतिहास गढ़ा था हिन्दी ने २२ देशों के प्रतिनिधियों का, एक इतिहास रचा हिन्दी ने कोई भाषा भी बुरी नहीं, ये बात सोलह आनी सच्ची है लेकिन अपनी मातृभाषा ही, सच होती सबसे अच्छी है रहो किसी भी देश में जाकर, दिल में तेरे स्वाभिमान रहे होठों पर हिंदी भाषा हो और सदा दिल में हिन्दुस्तान रहे गंगा सी निश्छल-पावनता ले, युगों-युगों से बहती आई भला कौन भाषा छू सकती है, हिन्दी भाषा की ये गहराई जिनको अपने राष्ट्र, अपनी भाषा पर होता है प्यार नहीं सच! ऐसे जयचंदो को देश में, है रहने का अधिकार नहीं परिचय :...
हिंदी
कविता

हिंदी

निकिता तिवारी हलद्वानी (उत्तराखंड) ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में सम्मिलित रचना ह से कहते हैं हम हिंदी जिसके माथे सजेगी बिंदी हर व्यक्ति बोले हैं हिंदी अनपढ-गंवार चाहे पढ़ी-लिखी संस्कृत इसकी जननी है तभी तो यह सम्मान हैं हिंदी भारतीयों की तो शान बढ़ाए हम सबका अभिमान बचाए पूरा भारत एक है चाहे धर्म अनेक हैं फिर भी बोले भाषा एक हैं हिन्दी॥ परिचय :-  निकिता तिवारी निवासी : जयपुर बीसा, मोटाहल्दू, हलद्वानी (उत्तराखंड) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आपको प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना, कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी...
मेरी हिंदी
कविता

मेरी हिंदी

श्रीमती अनिता गौतम राजनांदगांव भरका पारा ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में सम्मिलित रचना हिंदी मेरी बोली नहीं, मेरा अभिमान है मेरा अस्तित्व है, मेरी पहचान है मेरी आत्मा है, आत्मसम्मान है संस्कृति और संस्कारों की मुस्कान है हिंदी मेरी आवाज़ है हिंदी विश्व का सरताज है दिल की दिल से जोड़ती प्रीत का पैग़ाम है सहज है सरल है पर अर्थों में महान है हिंदी मानवता और एकता की जान है युगों युगों तक इसकी गौरव गाथा का बखान है मेरी हिंदी भाषा सबसे महान है। परिचय :-  श्रीमती अनिता गौतम जन्म दिनांक : १४ दिसम्बर १९७५ निवासी : राजनांदगांव भरका पारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आपको प्रेषित मेरी...
विश्व हिंदी दिवस
कविता

विश्व हिंदी दिवस

पूनम धीरज राजसमंद, (राजस्थान) ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में सम्मिलित रचना अक्सर हिंदी खेला करती मेरे मन के बाग में शब्दों की चुनर ओढ़ ठुमकती कविता के अनुराग में बन मेघ विचारों पर छा जाती चिंतन के आकाश में गीत ग़ज़ल की सरगम से कागज़ सींचे नव राग में वो भाव के मोती चुगती है फुदके कल्पना की डाल पे निबंध, कहानी में चहकती उड़ती जीवन के विराग में है पगडंडी सी सरल सुलभ सागर सी असीम अद्भुत अनुपम वो स्नेह सूर्य सी चमक रही रचना के सुरभित सन्मार्ग में एक दिन हिंदी ने सखी बना ली हर भाषा को विस्तार दिया अब इंद्रधनुष खिलता क्यारी में ज्यों नदियों का संगम प्रयाग में परिचय : पूनम धीरज जन्म : १८ जून १९८३ निवासी : राजसमंद, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित ...
हिंदी सभ्यता की आत्मा
कविता

हिंदी सभ्यता की आत्मा

अभिषेक मिश्रा चकिया, बलिया (उत्तरप्रदेश) ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में सम्मिलित रचना मैं अभिषेक मिश्रा, चकिया, बैरिया, जनपद बलिया (उत्तर प्रदेश) से आने वाला एक नवोदित हिंदी कवि हूँ, जिसकी लेखनी भाव, संस्कृति और समाज से संवाद करती है। मेरी रचनाओं का मूल उद्देश्य हिंदी भाषा की सांस्कृतिक गरिमा और मानवीय मूल्यों को अभिव्यक्त करना है। कविता मेरे लिए आत्मानुभूति और समाज-बोध का माध्यम है। विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर प्रस्तुत यह रचना हिंदी को केवल भाषा नहीं, एक जीवंत संस्कृति के रूप में समर्पित है। न ये महज़ संवाद की भाषा, न अक्षरों का श्रृंगार है, ये 'सत्यम शिवम सुंदरम' का, साक्षात् दिव्य अवतार है। ऋषियों की पावन तपस्या से, ये चेतना बन उभरी है, ये वो अमर संस्कृति है, जो रोम-रोम में बिखरी है। इसमें वेदों की गरिमा है, संस्...
हिन्दी हिंदुस्तान की
कविता

हिन्दी हिंदुस्तान की

आनंद कुमार पांडेय बलिया (उत्तर प्रदेश) ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में सम्मिलित रचना हिन्दी हिंदुस्तान की मोहताज नहीं पहचान की। विश्व भी लोहा माना है मेरे इस नव उत्थान की।। अमर असंख्यक कवियों को पहचान मिला, कविताओं का अद्भुत एक उद्यान मिला। सभी बोलियाँ इसमें घुल-मिल जाती हैं, तभी मातृ भाषा का भी सम्मान मिला।। हिन्दी हीं है नीव मेरे इस मुस्कान की। विश्व भी लोहा माना है मेरे इस नव उत्थान की।। हिन्दी की यह सृजन शीलता, नित नव पाठ पढ़ाती है। प्रेम भाव की निर्मल धारा, जन-जन तक पहुँचाती है।। कलम हुई आभारी इस एहसान की। विश्व भी लोहा माना है मेरे इस नव उत्थान की।। हिन्दी हिंद की बागडोर है, सत्य सनातन की पहचान। भाषाओं का अमृत संगम, हम सबकी आन-बान और शान।। यही किरण आनंद के हर विहान की। विश्व भी लोहा माना है मेरे इस ...
हिन्दी है हम – प्रतियोगिता में तृतीय स्थान प्राप्त रचना
कविता

हिन्दी है हम – प्रतियोगिता में तृतीय स्थान प्राप्त रचना

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में तृतीय स्थान प्राप्त रचना हिन्दी है हम, हिन्दुस्तान ये हमारा। फिर क्यों न मने हिंदी दिवस प्यारा। हिन्दी है … भाषाएँ अनेक, हिंदी सब मे सितारा। हिंदी सर्वव्यापी जोड़ने की सूत्रधारा हिन्दी है… ओम् है सृष्टि , मस्तक पर है बिन्दी। भाषाएँ रहें अधूरी हो न जहाँ हिंदी। हिन्दी है… सोच हो हमारी हिंदी हो राष्ट्र भाषा। बहुसंख्यक भाषी की पूरी हो आशा। हिन्दी है… सशक्त राष्ट्र भाषा जिसकी पहचान। मिला है देश की संस्कृति को सम्मान। हिन्दी है … बहु भाषी देश हमारा सब से न्यारा। अनेकता मे एकता हिंदी ही सहारा। हिन्दी है … परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिनांक :१४ नवम्बर १९४६ शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल.बी. निवासी : उज्जैन (मध्य प्रदेश)...
भारत की हिय वासिनी – प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त रचना
छंद, दोहा

भारत की हिय वासिनी – प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त रचना

शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" ग्वालियर (मध्यप्रदेश) ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त रचना भारत की हिय वासिनी, हिन्दुस्तान की शान। हिन्दी के आँचल तले, अर्जित उत्तम ज्ञान।। अक्षर -अक्षर कर रहा, सतत राष्ट्र उत्थान। हिन्दी माता हिन्द की, भारत का अभिमान।। हिन्दी में साहित्य है, माँ का गौरव भाल। छन्द गीत देते सदा, सुभग सुधा शुचि चाल।। अलग -अलग भाषा करें, हिन्दी से मृदु योग। एक सूत्र में बाँधती, भिन्न प्रान्त के लोग।। भाते मन को हैं सदा, हिंदी कविता गीत। सरस प्यार के बोल से, लेती मन को जीत।। पूर्ण राष्ट्रभाषा बने, मिलकर लो संज्ञान। हिन्दी के उत्थान का, लक्ष्य सभी लो ठान।। परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" निवासी : ग्वालियर (मध्यप्रदेश) रुचि : गद्य/पद्म लेखन एवं गाय...
हिन्दी में ही वेद है – प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त रचना
दोहा

हिन्दी में ही वेद है – प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त रचना

आशा जाकड़ 'आस' इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त रचना हिन्दी में ही वेद है, हिन्दी होत पुराण। हिन्दी में उपनिषद हैं, हिन्दी में कल्याण।। हिन्दी बोलो प्रेम से, कान में शहद घोल । पीड़ा दूर मिटा सके, इसका तोल न मोल।। हिन्दी भाषा हृदय की, हिन्दी हिन्दुस्तान। भाषा है सर्व जन की, हिन्दी पर अभिमान।। हिन्दी सबको जोड़ती, हिन्दी देश महान। अतीत के पन्ने लिखे, हिन्दी बसते प्राण।। हिन्दी बोली सरल है, मस्तक की ये शान । भारत भाल की बिन्दी, हिन्दी बढ़ाये मान।। विरह की पीड़ा लिखती, मिलन की मधुर तान। शौर्य की गाथा बरसे, वीर का स्वाभिमान।। परिचय :- आशा जाकड़ (शिक्षिका, साहित्यकार एवं समाजसेविका) शिक्षा - एम.ए. हिन्दी समाज शास्त्र बी.एड. जन्म स्थान - शिकोहाबाद (आगरा) निवासी - इंदौर (मध्य...
मगर पता कब चला
कविता

मगर पता कब चला

छत्र छाजेड़ “फक्कड़” आनंद विहार (दिल्ली) ******************** समय को सब कुछ सहते देखा मजबूर सत्य को बहकते देखा मगर पता कब चला घर की दीवारों को... गिरने लगे तो फिर गिरते ही गये रास्ते पतन के अविरल बढते गये मगर पता कब चला विश्वास के आधारों को... कदम बढा भी दिये गये अब आगे स्वार्थ के लिए सिद्धांत ऊंचे टांगे मगर कब किसने देखा लौट कर आते सवारों को... हंस हंस कर जीवन जी ही लिया खुशियों को गम छूने ही ना दिया मगर कब किसने देखा नभ में रोते हुये तारों को... चांद के उजालों में रात रोते देखा पाप और धर्म को संग सोते देखा मगर कब किसने देखा खाली होती मजारों को... भाई ने भाई से मुंह फेर लिया संबंधों को सियासत घेर लिया मगर कब किसने देखा जात-धर्म के चटखारों को... नेताओं से डर को सहमते देखा कुर्सी हेतु धर्म को मिटते देखा मगर कब पता चला लुटने का अपने ह...
शौर्य यात्रा
कविता

शौर्य यात्रा

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** शोर्य वीरता स्वाभिमान है वीर पराक्रमी योद्धा यहां, चाहे रक्त बहा धर्मवीरों का पर धर्म सनातन अमर यहाँ, वार किया विध्वंस किया मूल नाश किया उन आतताईयो ने, मुगलों ने मंदिरो को तोड़े है पर "आस्था" तोड़ न सके मन का। मुगलों का आक्रमण झेला है, कितने मंदिरों को तोड़ा है, आखिर में हार गए पापी, पर धर्म को सनातनियों ने नहीं छोड़ा है। थे एकजुट हे एक लक्ष्य हे मानवता हे प्रेम यहां, हे वीर पराक्रमी योद्धा यहां, हे देशभक्त हे संत यहां, हे धर्म संस्कृति का पाठ यहां हे तप तपस्या का भाव यहां, हे ज्ञान का दीप, सहानुभूति यहां, हे भाईचारे जैसे संबंध यहां। चाहे साल शताब्दी संवत बीते, नहीं मिटा सके कोई धर्म यहां, रग रग कण-कण में व्याप्त यहां हे परमेश्वर का हे वास यहां। इसे मिटा नहीं सकता कोई मिट गए यहां मिटान...
आया बसन्त
कविता

आया बसन्त

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** बसन्ती बयार बह रही घर, आगंन, चौखट, द़ारे रविकिरण लजा रही छुप-छुप कर गगन मे। बेले झुम रही अधखिली कलियो का बोझ लिए । भौरो का गुन्जन होता पुष्प पराग से पेडो के पर्ण हिल-हिल कर लेते बलय्या मां सरस्वती को देते बसन्त की बधाई या। कही कोयल कूकती स्वागत मे कही झरनो की फुहारे भरे स्फुरण कही झरना नहलाता बसन्त को तो कही पलाश फूल लाल टीका लगता। भरमाये भागते बादल बसन्त से धूप-छाँव का खेल खेलते नदी, तडाग की लहरे देती बसन्त को झुले सागर की मीन नृत्य करती बसन्त की अगवानी मे। परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना ...
चंद अल्फाज़
कविता

चंद अल्फाज़

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** आप में सुशीलता है या नखरो नाज, आपके मुंह से निकला चंद अल्फाज, बयां कर जाता है आपका किरदार व अंदाज, आपके रहन सहन का तरीका, आपके जीवन जीने का सलीका, ए आइ के जमाने में आज हम पहुंचे हैं भले, मगर भांपने का तरीका रहा है पहले, आपकी सोच, आपके मित्र, आपके जीवन जीने का अंदाज और ये इत्र, बहुत कुछ बता देता है, आप इस धोखे में मत रहिए कि चरित्र को छुपा लेता है, ये अल्फाज ही है जो दिलाता है मान सम्मान, तो कभी दिलाता है रुसवाई और अपमान, कब,कहां,कौन से शब्द कहने है लो जान, समाज में रहकर ही सीखा जाता है ज्ञान, दिख जाता है बहुत जगह पढ़ा लिखा गंवार, जो नहीं जानता तहज़ीब और प्यार, तो अल्फाजों को संभाल कर रखिए, किसके सामने क्या बोलना है आंखें खोलिए और देखिए। परिचय :-  राजेन्द्र लाहिर...
सब शौक हुए पूरे, अब सांसों को जीना …
कविता

सब शौक हुए पूरे, अब सांसों को जीना …

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** सब शौक हुए पूरे, अब सांसों को जीना। वो देता ज्ञान अमृत, बस उसको ही पीना है। सब शौक... दी हमको श्रेष्ठ योनी, उपकार है प्रभू का। परिवार दिया उत्तम, ये प्यार है प्रभू का। दायित्व जो भी देता, पूरे वही कराता। जैसे भी प्रभु रखे, वैसे हमें जीना है। सब शौक... सृष्टि का सृजन करता, ये कार्य है प्रभू का। सृष्टि को पोषणा भी, इक कार्य है प्रभू का। गिनती की मिली सांसे, निश्चित है ये रुकेंगी। जो भी बची है उनको, सुमिरन में लगाना है। सब शौक... मानव की योनी ईश्वर, मुक्ति के हेतु देता। बुद्धि विवेक देकर, वो श्रेष्ठ बना देता। सब संत यही कहते, बस राम नाम जप तू। प्रभू नाम में ही रमकर, मुक्ति को भी पाना है। सब शौक ... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करत...
क्या करें कि …
कविता

क्या करें कि …

सुशी सक्सेना इंदौर (मध्यप्रदेश) ******************** सुना है हर दर्द मिट जाते हैं, मुस्कुराने से। क्या करें कि... आंसू आ ही जाते हैं, किसी न किसी बहाने से। आँधियों का तो काम ही है चिरागों को बुझाना क्या करें कि... हम भी पीछे नहीं हटते चिरागों को जलाने से। जो अपने हुआ करते हैं वो रूठा नहीं करते क्या करें कि... हर कोई अपना नहीं बनता लाख मनाने से आंखों ने देख लिए हैं न जाने कितने समुंदर क्या करें कि... अब प्यास नहीं बुझती किसी भी मयखाने से रात भर जागा किए हम जिसके दीदार के लिए क्या करें कि... ऐ साहिब, उस चांद को बादलों ने छुपाकर रखा है जमाने से परिचय :- सुशी सक्सेना निवासी : इंदौर (मध्यप्रदेश) इंदौर (मध्यप्रदेश) निवासी सुशी सक्सेना वर्तमान में, वेबसाइट द इंडियन आयरस और पोगोसो ऐप के लिए कंटेंट राइटर और ब्लॉग राइटर के रूप में काम करती हैं। आपकी कवि...
वो मेरे पिता हैं
कविता

वो मेरे पिता हैं

बाल कृष्ण मिश्रा रोहिणी (दिल्ली) ******************** वो तप है, धर्म है, विवेक है, कर्म है वो विद्या है, बुद्धि है, बल है, श्रम है।। वो श्री है, शक्ति है, श्रेष्ठ है, संबल है, वो जनक है, पालक है, पोषक है वो जल, धरा, गगन, वायु, अग्नि, सूर्य, चंद्र है, वो मेरे स्वर्ग हैं।। वो कर्तव्य है, प्रतिष्ठा है, उपासना है, वो धन है, धर्म है, सुख है, प्रार्थना है वो वेद है, उपनिषद है, भक्ति है वो कृष्ण के श्लोक, राम की चौपाई है वो मेरे पिता हैं।। परिचय :- बाल कृष्ण मिश्रा निवासी : रोहिणी, (दिल्ली) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आपको प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना, कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय ...
सात अधोलोक
कविता

सात अधोलोक

सुषमा शुक्ला आबिदजान (अफ्रीका) ******************** हिंदू पुराणोंके अनुसार कुल मिलाकर सात अधोलोक हैं अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल। अतल की गहराइयों में इच्छाओं का वास है, जहाँ माया मुस्काती है, भोगों का प्रकाश है। वहाँ सत्य भी छल बन जाए, ऐसा उसका जाल, मनुष्य अपने ही मन में खो दे विवेक का हाल। वितल में वैभव रहता, स्वर्ण समान चमकता, लोभ की चकाचौंध में हर विवेक है भटकता। धन ही देव बन बैठा, कर्म हुआ है मौन, जहाँ सुख क्षणिक लगते हैं, शांति रहती कौन? सुतल वह तल है जहाँ बलि का शासन गाया, अहंकार को त्याग जहाँ विष्णु ने सिखलाया। दमन नहीं, मर्यादा है वहाँ का विधान, त्याग से ऊँचा होता है सच्चा इंसान। तलातल और महातल, भय और विष के धाम, असुरों की आकांक्षाएँ, अंधकार का नाम। क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष यहाँ साँसों में पलते, मानव मन के राक्षस भी यहीं आकर ढलते। ...
गीता ज्ञान-जीवन निदान
कविता

गीता ज्ञान-जीवन निदान

मोहिनी गुप्ता राजगढ़, ब्यावरा (मध्य प्रदेश) ******************** कुरुक्षेत्र - समर में दिया श्री कृष्ण ने अर्जुन को ज्ञान। अज्ञान से ज्ञान की ओर "गीता ज्ञान - जीवन निदान"। गीता के हर श्लोक में होती कुछ ज्ञान की बात। समझ जाए जो नर नारी तो होता जीवन पार। देते इक श्लोक में श्री कृष्ण अर्जुन को ये सीख। नहीं इन्द्रियों के वश में रह कर कुछ कर्म उचित। हो न्यायोचित कर्म और हो जगत का कल्याण। रख दूर स्वयं को भोग इंद्रियों से कहना ये मान। इंद्रियों से श्रेष्ठ मन और मन से भी श्रेष्ठ मानस। मानस (बुद्धि) से भी श्रेष्ठ आत्मा जगत का सार। आत्मा जो अजर - अमर है इंद्रियां तो स्थूल है। न कभी मरती है और न ही कभी लेती जन्म है। पा इंद्रियों पर विजय लगाए ईश आराधना में ध्यान। उसका कर्म और जीवन हो जाता है सफल बारंबार। हे पार्थ ! उठो ! अपने मन से निकालो भय। कर विवेक का प्र...
पूस मास की शीत
कविता

पूस मास की शीत

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** थरथर धरती काँपतीं, काँपे हैं हर लाल। ठिठुर रहे सब ठंड से, द्वारे आया काल।। मौसम सर्दी आ गया, हुआ ठंड का जोर। काँप रहे हैं हाथ भी, त्रास दे रही भोर।। ठंड ये पूस मास की, लेती सबकी जान। मार्गशीर्ष थी शीत कम, अब सो कंबल तान।। भगती कहाँ अलाव से, पूस मास की शीत। नाम धूप का है नहीं, कुहरा छाया मीत।। दुबक रजाई में रहे, बच्चे वृद्ध जवान। ठंड कड़ाके की पड़ी, खोले कौन दुकान।। मफलर बाँधा कान में, दस्ताने हैं हाथ। मौजे पहने पाँव में, चलें ठिठुर कर पाथ।। घर आजा मनमीत अब, आया मौसम शीत। नित्य विरहा में डूबती, रहती प्रिय भयभीत।। पूस मास दे त्राण है, नित्य चलाता वाण। सर्दी बड़ी प्रचंड है, कर प्रभु अब कल्याण।। यौवन पर तो शीत है, वयोवृद्ध हैं मौन। सिर पर सबके नाचती, पीर हरे अब कौन।। स्वेटर भी शरमा र...
नौकरिहा दामाद
आंचलिक बोली, कहानी

नौकरिहा दामाद

प्रीतम कुमार साहू 'गुरुजी' लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़) ******************** (छत्तीसगढ़ी कहिनी) गाँव के गउटियाँ कहत लागें दुकलहा करा कोनो जिनिस के कमी नइ रिहिस। खेत, खार, धन दउलत, रुपिया, पइसा सबों जिनिस रिहिस। सादा जीवन उच बिचार के रद्दा म चलत दुकलहा अउ दुकलहिन मजा म जिनगी बितावत रहय। फेर संसो के बात ए रिहिस कि उँकर एके छिन बेटी चँदा जेकर बर नौकरिहा सगा देखत-देखत चार बछर होगे रिहिस। चँदा के उमर चालीसा लगे बर दु बछर कम रिहिस। सगा मन ठिकाना नइ परत रिहिस। ऐसना बेरा म पचास एकड़ खेत के जोतनदार बने रोठहाँ सगा धर के सुकलहा हर अपन मितान दुकलहा करा आनिस। फेर दुकलहा हर ये कहिके सगा मन ल मुँहाटी ले लहुँटा दिस के लइका के कुछु नौकरी चाकरी नइ हे कहिके। मोर बेटी ह अतेक पढ़े लिखे हे त नौकरिहा दामाद होना चाही। पाछु सुकलहा हर कहिस घलोक देख मितान खेती किसानी का नौकरी ले कम आय ! मनखे के चाल चलन अउ चरित ह ...
एक युग, एक विचार
कविता

एक युग, एक विचार

रूपेश कुमार चैनपुर (बिहार) ******************** ग्वालियर, मध्यप्रदेश की पावन धरा ने जन्म दिया एक बालक को, नाम हुआ अटल, स्वरों में कविता, शब्दों में सत्य, वाणी थी सरल, मन प्रखर, अडिग, स्थिर, निर्मल। पिता शिक्षक संस्कारों की छाया, माँ की ममता, राष्ट्र का स्वप्न, बाल्यकाल से ही चेतना जागी, भारत बने विश्व में उज्ज्वल स्वर्ण-रत्न। कलम उठी तो कविता बह चली, राजनीति आई तो सेवा बन गई, विचारों में मतभेद रहे होंगे, पर मर्यादा कभी न टूटी, न झुकी, न गई। जनसंघ से संसद तक की यात्रा, संघर्षों से रचा हुआ इतिहास, एक नहीं, कई बार पराजय मिली, पर हर हार बनी भविष्य का प्रकाश। “हार नहीं मानूँगा” कहने वाला, स्वयं उस पंक्ति का प्रमाण था, लोकतंत्र का सच्चा प्रहरी वह, विपक्ष में भी जिसकी वाणी समाधान था। तीन-तीन बार बने प्रधानमंत्री, पर सत्ता कभी सिर पर न चढ़ी, सरल ज...
तैयारी जीत की
कविता

तैयारी जीत की

अशोक कुमार यादव मुंगेली (छत्तीसगढ़) ******************** नया साल बड़े ही धूमधाम से मनाना है। कुछ पाने के लिए, कुछ कर दिखाना है।। जीत होगी या हार होगी, मत सोचो तुम, हर हाल में मंजिल के शिखर तक जाना है।। जब तक साँसे चल रही है, तुझमें भी है दम। कई बाधाएँ आएँगी, रुक मत, बढ़ा कदम।। गिरकर फिर उठ, संभाल अपने आप को, आँधी और तूफान बन, वज्र का बना बदन।। छद्मरूप त्याग कर, भाग्य का लिखा बदल। नये ज्ञान-विज्ञान से, जीवन में ला हलचल।। असंभव को संभव कर, तू कुछ बन सकता है, विद्या प्रकाश पुस्तक में ध्यान लगा हर-पल।। अंतर्मन की ज्वालामुखी को, ज्ञान से धधका। अपने आप को लक्ष्य से कभी भी मत भटका।। तू है धुरंधर, अंधाधुंध कर परीक्षा की तैयारी, अंतिम में मिलेगी कामयाबी, कर्म में मन लगा।। परिचय : अशोक कुमार यादव निवासी : मुंगेली, (छत्तीसगढ़) संप्राप्ति : शिक्षक एल. बी., संस्थापक एवं अध्यक...
कलयुग
कविता

कलयुग

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** आज के युग मे मानो कलियुग प्रगट हो गया है, लगता है कोई बुरा समय एक आकर लेकर दुनिया पर छा गया है ! चारों ओर अशांति विद्रोह और भय व्याप्त हो गया है, विचारों में जहर और व्यवहार में आक्रोश हृदय में घर कर गया है ! गलत को सही साबित करने की कला आ गई है, झूठ को सच का मुखौटा पहनने का हुनर आ गया है ! पाप-पुण्य के मायने बदल गए हैं हर इंसान स्वार्थी हो गया है ! कलयुग कोई तिथि या युग नहीं जब अनाचार- मन और विचारों में मे व्याप्त हो जाए, वही कलयुग अवतरित हो जाता है ! ये मन के पापों की एक अवस्था है, जो सब कुछ तहस नहस कर देता है, पाप समाज में नहीं इंसान के भीतर जन्म लेता है और वही विचार कर्म बनते है ! कलयुग की स्तिथि से हमको स्वयं से ही बाहर निकलना होगा, करुना और प्रेम का मार्ग पकड़ना होगा, ...
अधूरे ख्वाबों के पार जाना है मुझे
कविता

अधूरे ख्वाबों के पार जाना है मुझे

सुशी सक्सेना इंदौर (मध्यप्रदेश) ******************** अधूरे ख्वाबों के पार जाना है मुझे दिल जो चाहे चांद तो, पाना है मुझे। जी लिए बहुत इस दुनिया के लिए खुद से किया वादा भी तो, निभाना है मुझे। मंदिर मस्जिद में पूजूं ये हसरत नहीं इक मूरत प्रेम की दिल में, बिठाना है मुझे। राहों में गिरेंगे और संभालेंगे भी कभी जिंदगी के सफर को यादगार बनाना है मुझे। परिचय :- सुशी सक्सेना निवासी : इंदौर (मध्यप्रदेश) इंदौर (मध्यप्रदेश) निवासी सुशी सक्सेना वर्तमान में, वेबसाइट द इंडियन आयरस और पोगोसो ऐप के लिए कंटेंट राइटर और ब्लॉग राइटर के रूप में काम करती हैं। आपकी कविताएं और लेख विभिन्न पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए हैं। आपने कई संकलनों में भी योगदान दिया है एवं कई प्रशंसा पत्र और पुरस्कार प्राप्त किए हैं। विशेष रूप से, आपको अनुराग्यम द्वारा गोल्ड मेडल एवं वंदे ...
नववर्ष
कविता

नववर्ष

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** नववर्ष जगा देगा फिर से, जीवन में टूटी उम्मीदों को। वादा कर लेगा हताशा से, व्यक्ति सपने पूरे करने को। प्रफुल्लित होगी मन मयूरी, रंग चढ़ेगा आशा किरणों को। पल्लवित होगा हृदय चमन, यूं हौसला मिलेगा कदमों को। फिर जज्बा जगेगा अंतस में, कर्मठ बांध लेगा मुट्ठियों को। आस को परवाज मिलेंगे फिर, कसूमल रंग नव खुशियों को। सुदूर क्षितिज से राह मिलेगी, कमर कसे चल पड़ेंगे लक्ष्य को। अब सुलझेंगी उलझी गुत्थी, नवल उमंग मिलेगी कर्मों को। जोश जुनून उम्मीद उत्साह, पुनर्जीवित हुये सब नव वर्ष को। सुखी जीवन वेदना होगी दूर, परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है...