गंगा मैया ने सुनली पुकार
प्रेम नारायण मेहरोत्रा
जानकीपुरम (लखनऊ)
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गंगा मैया ने सुन ली पुकार,
बुलावा भेज दिया।
देखी बच्चे की तड़प अपार,
बड़ा उपकार किया।
गंगा मैया ने सुन ली ...
माघ मेला सजाती है मैया मेरी,
अपने बच्चों को बाहों में लेने के मित।
जो समझ पाते है अपनी मां की तड़प,
वो लगाते हैं डुबकी तो उनका है हित।
मां ने आंचल में अपने बुला बच्चो को,
उन पर अपना दुलार बहा है दिया।
गंगा मैया ने सुन ली ...
निकली गौमुख से,
और जाके सागर मिली।
निकली जिस तीर्थ से,
उसकी महिमा बढ़ी।
जहां निकली और बच्चे मिलन आए तो,
उनपे अपनी कृपा बरसा है दिया।
गंगा मैया ने सुन ली ...
मैने हरद्वार में मां को पाया बहुत,
भाव आया कि भक्तों को लेकर चलूं।
वृद्धों की सेवा का फल मिलेगा मुझे
साथ जाने वाला धन कमाता चलूं।
मेरे आराध्य ने सात्विक भाव को,
देके साहस सदा ही है पूरा किया।
गंगा मैया ने सुन ली...



















