जयदयालजी गोयन्दका
शुचिता अग्रवाल 'शुचिसंदीप'
तिनसुकिया (असम)
********************
देवपुरुष जीवन गाथा से,
प्रेरित जग को करना है,
संतों की अमृत वाणी को,
अंतर्मन में भरना है।
है सौभाग्य मेरा कुछ लिखकर,
कार्य करूँ जन हितकारी,
शत-शत नमन आपको मेरा,
राह दिखायी सुखकारी।१।
संत सनातन पूज्य सेठजी,
जयदयालजी गोयन्दका,
मानव जीवन के हितकारी,
एक अलौकिक सा मनका।
रूप चतुर्भुज प्रभु विष्णु का,
राम आचरण अपनाये,
उपदेशों को श्री माधव के,
जन-जन तक वो पहुँचाये।२।
संवत शत उन्नीस बयालिस,
ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी पावन,
चूरू राजस्थान प्रान्त में,
जन्मे ये भू सरसावन।।
माता जिनकी श्यो बाई थी,
पिता खूबचँद गोयन्दका,
संत अवतरण सुख की बेला,
धरती पर दिन खुशियों का।३।
दिव्य रूप बालक का सुंदर,
मुखमण्डल तेजस्वी था,
पाँव दिखे पलना में सुत के,
लगता वो ओजस्वी था।।
आध्यात्मिक भावों का बालक,
दया,प्रेम,सद्भाव लिये,
जयदया...

























