साहब यूँ ही हम किसान ना कहलाते
कृष्ण शर्मा
सीहोर म.प्र.
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भूखे को भोजन कराते,
प्यासे को पानी हे पिलाते
दिल से हम अंजान
रिश्तो को अपना बनाते।
साहब यूँही हम किसान ना कहलाते।
बेरोजगार खुद हूँ,
पर गरीबो को रोजगार
देंने में जरा भी नही घवराते।
सो जाऊंगा भूखा खुद,
पर सबको पेट भर खाना हे ख़िलाते।
साहब यूँही हम किसान ना कहलाते।
हमारा नाम लेकर ये जो
जमीन पर दुग्ध, सब्जी
जो हे गिराते, ना जाने क्यों
हमारे मान को नीचा हे दिखाते,
हम तो एक बूंद दुग्ध को भी
अपने हाथों से हे उठाते हे साहब
साहब यूँही हम किसान ना कहलाते।
कोई नही है किसान का
यहाँ सब अपनी राजनीति हे चमकाते,
नाम लेकर हमारा कही
अपराध है ये किये जाते।
करते रहो बदनाम हमे यूँही
पर हम अपना कर्म यूँ ही
ईमानदारी से हे हम किये जाते।
साहब यूँही हम किसान ना कहलाते।
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परिचय :- कृष्ण शर्मा
निवासी : सीहोर म.प्र.
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