जिंदगी
धैर्यशील येवले
इंदौर (म.प्र.)
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चलते चलते राह में
ठहर गई है जिंदगी
कांटा बन के पाव में
चुभ गई है जिंदगी।
क्या गुप्तगु करे
तुझसे ये मेरे दोस्त
जुंबा पत्थर की
बन गई है जिंदगी।
बड़ा आसान है, बोझ को
जिस्म पर ढोना,
तकलीफ होती है, जब
दिल पर बोझ बनती है जिंदगी।
कौन अपना कौन गैर
समझ मे नही आता
आज चेहरा बदल गया उसका
कल तक थी जो मेरी जिंदगी।
चोट खाई तो यकीन आया
ये हर दौर का सच है
इंसान को जख्म पे जख्म
देती रहती है जिंदगी।
तुझे तेरे गुनाहों की
सजा मिली है, धैर्यशील
खुदा का बनाया
कैदखाना है जिंदगी।
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परिचय :- धैर्यशील येवले
जन्म : ३१ अगस्त १९६३
शिक्षा : एम कॉम सेवासदन महाविद्याल बुरहानपुर म. प्र. से
सम्प्रति : १९८७ बैच के सीधी भर्ती के पुलिस उप निरीक्षक वर्तमान में पुलिस निरीक्षक के पद पर पीटीसी इंदौर में पदस्थ।
सम्मान : हिंदी रक्षक मंच इंदौर (hindirakshak.com) द्वारा हिंदी...






















