नमन सदा कुर्बानी को
अर्चना अनुपम
जबलपुर मध्यप्रदेश
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समर्पित - वीर देशभक्त बलिदानियों हेतु
भाव - देशभक्ति
नमन सदा कुर्बानी को।
उनकी ही नहीं, उन अपनों की,
जिनने खोए कुल के चिराग,
जिनका सेंदुर लेकर वैराग,
माटी का मूल्य चुकाया है।
भारत का मान बढ़ाया है।।
माटी का मूल्य चुकाया है।
भारत का मान बढ़ाया है।।
वो शीश देख भगनी बोले,
तेरी राखी आज तरसती है;
रोती है बहुत बिलखती है।
हम तो दो दिन ही याद रखें,
वह मां; की आंखों से छिपकर
बाबुल को कुछ हिम्मत देकर।
धीमे से कहीं से सिसकती है।
गर्मी में छत तपते होंगे।
सर्दी ठिठुरन सहते होंगे।
बारिश में हर कोने कोने,
परिवार सहित रोते होंगे।
आंचल जननी का प्यारा है,
अश्रु का एक सहारा है।
ग़म हम भी उनका भूल चले,
अपने ही में मशगूल चले।
वो फिर शहीद हो जाएंगे,
हम फिर अफसोस मनाएंगे।
किसलिए किया बलिदान दिव्य?
यह कब खुद को समझाएँगे?
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