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गीत

थोथे सारे वादे निकले …
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थोथे सारे वादे निकले …

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** थोथे सारे वादे निकले, सच्चाई के लाले। आँखों बँधी लोभ की पट्टी, होते नित घोटाले।। उबड़-खाबड़ सड़क कोसती, व्यस्त सभी चौराहे। डामरीकरण का नाटक बस, होता जब जी चाहे।। मन में क्षोभ हज़ारों लेकिन, ख़ुद ही दुश्मन पाले। टौल-टैक्स भारी ले-लेकर भरते रोज़ ख़ज़ाने। सड़क सुधरती कागज़ पर ही, काम सभी मनमाने।। सच्चाई पर मौन भीष्म बन, काम करें सब काले। दुर्घटनाएँ होतीं प्रतिदिन, रोतीं हैं माताएँ। थोड़े दिन आन्दोलन होते, चक्रव्यूह रचनाएँ।। अन्धी नगरी चौपट राजा, बुनता रहता जाले। औरँगज़ेबी आदेशों से, दिल पर चले कुल्हाड़ी। गहरी चोट कुशासन देता, उलट-पुलट हर गाड़ी।। बस नीलामी आदर्शों की करते टोपी वाले। परिचय : मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सु...
बरखा की बहार
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बरखा की बहार

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** ताल-तलैयां रीत गए थे नदियाँ भी थीं सूखी। बुझा-बुझा मन रहता था और काया भी थी रूखी।। बरखा की बूँदों से पर अब, मिला खुशी का खत है। बहुत दिनों के बाद सभी की खिली-खिली तबियत है।। कंठ शुष्क थे,जी घुटता था, बेचैनी मुस्काती। सारा आलम व्यथित हुआ था, साँसें भी थम जाती हरियाली धरती पर बिखरी, लगता सुखद सतत है। बहुत दिनों के बाद सभी की खिली-खिली तबियत है।। स्वेद बहा करता था निशिदिन पर अब जल साथी है। आसमान से अमिय बरसता, हर शय अब गाती है।। मौसम तो मनभावन लगता, हर पल उल्लासित है बहुत दिनों के बाद सभी की, खिली-खिली तबियत है।। बूँदें लाईं नवल सँदेशे, अमन-चैन के मेले। बच्चे नाव चलाते जल में, लिए हर्ष के रेले।। जीवन को नवरूप मिला, कृषक हुआ आनंदित है। बहुत दिनों के बाद सभी की खिली-खिली तबियत है।। परिचय ...
वंचनाओं की झड़ी है
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वंचनाओं की झड़ी है

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** वंचनाओं की झड़ी है, दूर पर अपना ठिकाना। ढूँढ़ता बेचैन मन है, गीत मनभावन सुहाना।। भोर उजली है नहीं अब, घोर तम हर ओर छाया। पीर किसको हम बताएँ बन कुहासा स्वार्थ आया।। रोज बनती तालियाँ तक, अब शिकारी का निशाना। घाट सब सूने पड़े हैं, शांत है चौपाल देखो। हिल रही बुनियाद सारी, आ गया भूचाल देखो।। नफ़रतों के गिद्ध घूमें, सोच कर पग को बढ़ाना। पश्चिमी आँधी चली है, हो रही निष्पात डाली। धूल में संस्कार सब हैं, तरो रहा बस बैठ माली।। आज वसुधा भी विकल है, देख नूतन यह जमाना। गाँव का सौन्दर्य फीका, शाख - पीपल रोज कटती। वृद्ध तुलसी काँपती है, भींत घर की रोज़ फटती।। आह भरता मन मयूरा, भूल कर जीवन तराना। परिचय : मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स...
भोले पंछी क़ैद किए सब
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भोले पंछी क़ैद किए सब

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** भोले पंछी क़ैद किए सब, निर्मम हुआ शिकारी। पश्चिम की चलती आँधी में, पूनम रातें कारी।। गईं काल के मुँह निष्ठाएँ, चुप दर्शक भी सारे। अंतहीन पीड़ा मानव की, घूम रही मन मारे। प्रजातंत्र की बलिहारी है, सोते खद्दरधारी। रोज़ समस्या नई खड़ी है, हृदय करें नित क्रंदन। उल्टी चली हवाएँ सारी, मरता प्यासा मधुवन।। पत्थर ही पत्थर राहों में, तपती सड़कें सारी। रही बदलती नित्य नीतियाँ, लुटती है रजधानी। नारों का हर तरफ़ शोर है, करते सब मनमानी।। चौसर के खेलों पर अब भी, लगे दाँव पर नारी। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट पौत्री : निहिरा, नैनिका स...
योग अपनाओ, रोग भगाओ
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योग अपनाओ, रोग भगाओ

इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" गोरखाना, नोहर (राजस्थान) ******************** योग अपनाओ, रोग भगाओ, जीवन को तुम महकाओ, तन को साजो, मन को माजो, खुशियाँ तुम अपनाओ। योग भगाए रोग... योग भगाए रोग... सुबह-सवेरे जब तुम उठना, ताजी हवा में श्वास तो भरना, 'सूर्य-नमस्कार' से दिन की शुरुआत तुम करना। आलस त्यागो, शक्ति जागो, योग पथ पर चल जाओ, योग भगाए रोग... प्राणायाम की शक्ति न्यारी, दूर हो व्याधि सारी, बीमारी अब हार मान ले, होगी जीत तुम्हारी। ध्यान लगाओ, मन को सजाओ, अंतर्मन में मुस्कुराओ, योग भगाए रोग... स्वस्थ काया, सात्विक माया, योग ही सबसे सच्चा, बुजुर्ग हो या युवा यहाँ पर, योग करे हर बच्चा। जग को जगाओ, सबको बताओ, योग की अलख जगाओ, योग भगाए रोग... योग भगाए रोग, जीवन को तुम महकाओ! परिचय :-  इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" उपनाम : "नोहरी" पिताजी का नाम : ...
कंचन मृग छलता है अब भी
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कंचन मृग छलता है अब भी

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** कंचन मृग छलता है अब भी, जीवन है संग्राम। उथल-पुथल आती जीवन में, डसती काली रात। जाल फेंकते नित्य शिकारी, देते अपनी घात।। चहक रहे बेताल असुर सब, संकट आठों याम। बजता डंका स्वार्थ निरंतर, महँगा है हर माल। असली बन नकली है बिकता, होता निष्ठुर काल।। पीर हृदय की बढ़ती जाती, तन होता नीलाम। आदमीयत की लाश ढो रहे, अपने काँधे लाद। झूठ बिके बाजारों में अब, छल दम्भी आबाद।। खाल ओढ़ते बेशर्मी की, विद्रोही बदनाम। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट पौत्री : निहिरा, नैनिका सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सत...
विषधरों को पालते हैं
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विषधरों को पालते हैं

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** विषधरों को पालते हैं, जो डुबोते प्रेम-बेड़े। आह भरती है गरीबी, और पैसा तन उधेड़े।। क्षीण होती आस है अब, गाज छाती पर गिरी है। प्रेम निष्ठा खो गयी सब, जेब स्वारथ से घिरी है।। बह रही तृष्णा हृदय में, काल के खाकर थपेड़े। जब चुनावी दौर आता, सैकड़ो उत्पात होते। चाल चलते हैं शकुनि- सी, नित नए आघात होते।। लालचों के शाल मिलते, जीत के फिर साथ पेड़े। कागजी अखबार निशदिन, खोलते दिन-रात पोलें। फिर धजी का साँप बनता, मूक बहरे बोल बोलें।। किस तरह सागर तरेंगे, जर्जरित नावों के बेड़े। चोंच लंबी मौत की है, रोग करता देख हमला। पैंतरा बदला सभी ने, हो रहा है नित्य घपला।। आपदा की ये सदी है, सुत पिता को हैं खदेड़े। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट ...
संकल्प
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संकल्प

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** एक नया संकल्प मनुज लो, मूल मंत्र को याद करो। आदर्शों की गंग बहाकर, सच्चाई आबाद करो।। बलवानी संकल्प सदा हों, उत्कर्षों की हो छाया। लक्ष्य ध्यान में रखकर मानव, जीवन में सबकुछ पाया।। दृढ़ प्रतिज्ञा श्रेष्ठ चुनो तुम, एक योग्य उस्ताद करो। निठुर नियति आघात बहुत हैं, हार नहीं लेकिन मानो। संघर्षों की डोर पकड़ लो, मंज़िल अपनी पहचानो। हर पड़ाव पर जय पाओगे, श्रम सीकर हो नाद करो। करो मनोरथ पूर्ण सभी तुम, सदाचार की हो माला। दूर रहो छल छद्म कपट से, ओढ़ दुशाला सत् वाला।। चिंतन रथ बैठो उत्साही, पूरी हर फ़रियाद करो। करो अध्ययन सद्ग्रंथों का, औरों की हर लो पीड़ा। पथ प्रशस्ति का होगा हासिल, आज उठा लो फिर बीड़ा।। सारा जीवन आनंदित हो, सदा उच्च संवाद करो। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" नि...
तिलचट्टे
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तिलचट्टे

भीमराव 'जीवन' बैतूल (मध्य प्रदेश) ******************** लगे बिलबिलाने तिलचट्टे, पाँव जमा के पक्के। नई दवा भी लगे खोजने, नेता हक्के - बक्के।। खोल लिए है सबने तरकश, तीखे लाँछन वाले। छेद रहे सपनों के तन को, लेकर निर्मम भाले।। अपने पिच पर लगा रहे सब, लंबे चौके-छक्के।। शतरंजी चालों पर भारी, राजा जी के घोड़े। नग्न पीठ पर लगे बरसने, तिकड़म वाले कोड़े।। इन कीड़ों पर फिर छल-छंदी, विष छिड़केंगे पक्के।। गली-गली में भेज दिए हैं, परचे लेकर प्यादे।। भक्तों को बैकुंठ दिखाने, करना तगड़े वादे।। इनके जेबों में डाले कुछ, काजू और मुनक्के।। क्रांतिकारियों के स्वागत में, सजी नई बन्दूकें। दमनकारियों के घर पहुँची, भरी बड़ी सन्दूकें।। छिप जायेंगे फिर तिलचट्टे, कल खाने को धक्के।। परिचय :- भीमराव 'जीवन' निवासी : बैतूल मध्य प्रदेश घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी य...
जय का वरण
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जय का वरण

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** विपदाओं से लड़कर, जय को तुम पा जाओ। मंज़िल होगी पास, सफलता गह हर्षाओ।। विपदाएँ तो नित ही मंगलगान सुनाती हैं। संघर्षों के भावों को, वे रोज़ जगाती हैं। जीवन हो खुशहाल, यही सबकी है चाहत, जो डर जाता उसको ही, वे रोज़ सताती हैं। साहस से प्रियवर तुम तो पूरे भर जाओ। मंज़िल होगी पास, सफलता गह हर्षाओ।। आपदाएँ कहती हैं बल को लेकर बढ़ना। एक नई गाथा को लेकर खुशियाँ गढ़ना। कभी न पीछे क़दम हटाना, कर्म यही है, अंधकार में उजियारे का वंदन करना। उल्लासित होकर प्रियवर मंगल बरसाओ। मंज़िल होगी पास, सफलता गह हर्षाओ।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए (इतिहास) (मेरिट होल्डर), एल.एल.बी, पी-एच.डी. (इतिहास) सम्प्रति : प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष इतिहास/...
डरे प्रश्न भी भूख-प्यास के
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डरे प्रश्न भी भूख-प्यास के

भीमराव 'जीवन' बैतूल (मध्य प्रदेश) ******************** डरे प्रश्न भी भूख-प्यास के, जिह्वा सके न खोल। हिटलर-सा हो गया घमंडी, दिल्ली का सेंगोल।। लगते हैं अब बागवान के, कातिल क्रूर इरादे।। मसल रहे हैं जब उपवन की, कलियाँ हिंसक प्यादे।। न्याय-देव को अब सत्ता की, बीन करे कंट्रोल।। जाल बनाने लगे हुए सब, मंचासीन जुलाहे।। भेड़ों को अब नित अफीम ही, चरा रहे चरवाहे। पत्रकारिता नैतिकता का, पहन न पाई खोल।। बटन दबाकर हुई अँगुलियाँ, खुद की ही हत्यारी। चोर उच्चकों के हाथों दी, घर की चौकीदारी।। कल की चिंता में 'जीवन' का, बिगड़ गया भूगोल।। परिचय :- भीमराव 'जीवन' निवासी : बैतूल मध्य प्रदेश घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्...
बैरन कोयल कूके प्रियतम
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बैरन कोयल कूके प्रियतम

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** बैरन कोयल कूके प्रियतम, प्रीति गगरिया छलकाती। कंगन खनकें नथनी डोले, सजनी चलती बलखाती।। अधर गुलाबी कंपन करते, कुंतल लट मुख पर आए। घूँघट पट से झाँके गोरी, छम-छम पायल झनकाए।। अल्हड़ यौवन ललचाता मन, चंचल चितवन शरमाती। प्रेम-वलय उर बगिया पलती, कलियाँ लेतीं अँगड़ाई। कत्थक करती मोहक मणियाँ, झूला झूले तरुणाई।। डाल-डाल मधुमासी डेरा, चतुर चमेली इतराती। करें सुवासित मस्त बयारें, गुल मकरंद लुटाते हैं। अठखेली करते भँवरे हैं, प्रेमिल उर मुस्काते हैं। मन में निश्छल प्रेम पला है, कामदेव छवि बहकाती। मनभावन गीतों की लड़ियाँ, रस पीयूष भरी प्याली। बौराते हैं बौर प्रीति के, कहती होठों की लाली।। प्रेम पताका फैली नभ तक, चूमे माथा लहराती। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य...
हिरणी के इस चंचल मन को
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हिरणी के इस चंचल मन को

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** हिरणी के इस चंचल मन को हवा वसंती महकाती। खिलता हरसिंगार चमन में, हम गाते गीत प्रभाती।। सौरभ सरिता उर में बहती, खिलती आशा की कलियाँ। पिया कहे सिंगार सलौना, चाहत में डूबी अँखियाँ।। यादें लेतीं हैं अँगड़ाईं, मुस्कानें सब मदमाती। प्रणय वल्लरी झूम रही है, अंग-अंग यौवन छाया। सजा कुंतलों पर गजरा है, देख मदन भी बौराया।। प्रेम तूलिका लिखती पाती, भेद खोलकर हर्षाती। प्रीति हमारी यह मधुमासी, प्रिय मधुर मुलाकातें हैं।। संबंधों के गठबंधन में, भ्रमरों की बारातें हैं।। मधुरस छलके तृषित अधर से, धड़कन -धड़कन इतराती। प्रियतम तेरी बनी मेनका, आशाएँ आलिंगन की। मन राधा बन बैठा व्याकुल, राह तके अनुमोदन की।। लगती आग मिलन की ऐसी, प्रेम क्षितिज में इठलाती। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवास...
राम जन्म के आनंद में
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राम जन्म के आनंद में

महेश बड़सरे राजपूत इंद्र इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** आया है आया है राम जन्म उत्सव २... दिखलाया है दिखलाया है सनातनी वैभव 2... राम जन्म के आनंद में, रंग-रंग के फूल खिले। छोटा-बड़ा नही है कोई, एक दूजे से गले मिले।। उत्साह और उल्लास भरा, भाव सभी में छाया है.... आया है आया है राम जन्म उत्सव २ ... बाल वृद्ध और बहनें करते, रामचरित का पारायन। गली मोहल्ले गूंजे जयकारे, राम नाम का हो गुंजन।। प्यारा नाम रामचन्द्र का, सकल विश्व को भाया है..... आया है आया है राम जन्म उत्सव २ ... जब थे राघव प्रकट हुए, अवध बन गया साकेत धाम। देवी देवता आ प्रगटे थे, अदृश्य रूप में करने प्रणाम।। देख हरी को शिशु रूप में, बैकुंठ लोक मुसकाया है..... आया है आया है राम जन्म उत्सव २ ... भोगवाद की चकाचौंध में, मत फंसना ओ मतवालों। रखना है आदर्श राम का, ओ संस्कृति के रखवालो...
संकल्पों की फुलवारी
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संकल्पों की फुलवारी

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** कुलवंती दयमंती है वह घर की लक्ष्मी हर नारी। तीनों लोकों में यश उसका सारा जग है बलिहारी।। उर विशाल माँ दुर्गा जैसा, जगजननी कहलाती है। जन्मे गर्भ से देवता हैं, धरती स्वर्ग बनाती है।। साहस करुणा की हे देवी, अभिनंदन है अवतारी। आशा है विश्वास वही है, दिव्य शक्ति है कल्याणी। जगत् को संजीवनी देती, मधुरस पूरित है वाणी।। सब रूपों में पूजित नारी, देखो सब पर है भारी। अपना धर्म निभाती हँसकर, पीर जगत् की हरती है। कर्म करे श्रद्धा से अपना, धरा उर्वरा करती है।। चहुँदिशि जय-जयकार उसी की, संकल्पों की फुलवारी। कीर्तिमान नित नूतन रचती, ध्वजा प्रगति की फहराती। करती है उत्थान देश का, अंतरिक्ष तक वह जाती।। त्यागी लक्ष्मी स्वाभिमानिनी, दुर्गावती कहाँ हारी। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" न...
रामजन्म भयो अवध में
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रामजन्म भयो अवध में

आशा जाकड़ 'आस' इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** चैत्र मास शुक्ल पक्ष शुभ नवमी आई, मध्यान बारह बजे शुभ समाचार लाई। अवनि से अंबर तक खूब ‌पुष्प है बरसाई। रामजन्म भयो अवध में खुशियांँ छाई।। रानी कौशल्या गोदी में ललनवा सुलाएं राजा दशरथ सिरहाने खड़े मंद मुस्काए कैकेई और सुमित्रा उनको दे रहे बधाई। राम जन्म भयो अवध में खुशियांँ छांई।। सखियांँ आवें, ताली बजा मंगलाचार गावें ढोलक बजाकर, हर्षित बधाई गीत गावें। नृप दशरथ बाँट रहे थाल भर-भर मिठाई। राम जन्म भयो अवध में खुशियांँ छाई।। समाचार सुन वशिष्ठ जी राजमहल आए राम की जन्म-कुंडली सबको सुनवाएं। हर्षित राजा वशिष्ठजी के चरणन पुजाई। राम जन्म भयो अवध में खुशियांँ छाई।। अयोध्या में सर्वत्र ढोल-ताशे बज रहे, घर-घर ढोलक, झांझ-मजीरे बज रहे। राजमहल द्वारे बज रही तुरई-शहनाई। राम जन्म भयो अवध खुशियांँ छाई।। बंदनवार सज रहे, मं...
आज क्यों
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आज क्यों

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** बात पर, आज क्यों, बंधु देखो अड़े। दुश्मनी, है बढ़ी, प्राण लेने खड़े।। है चकित, यह धरा, शांत आकाश है। रो रहे, खग सभी, हो रहा नाश है।। वीर जो, थे बहुत, पार्थ साथी थके। मित्र के, सारथी, क्रुद्ध होके रुके।। स्वार्थ में, क्रूर हो, वीर योद्धा लड़े। नित्य बम, फेंकते, दुष्ट शैतान हैं। ताकतें, चीख कर, ले रहीं जान हैं।। लक्ष्य है जीत का, बंध सब टूटते। उर चुभे, शूल हैं, बंधु हैं छूटते।। आज तो, शर्म से, वीर सारे गड़े। है नियति, यह निठुर, पार्थ भी जानते। भाग्य में, जो लिखा, वो हुआ मानते।। धर्म ही, कर्म है, युद्ध पर काल है। कौरवों, पाँडवों, का बुरा हाल है।। मर रहे, युद्ध में, आज छोटे बड़े। शक्ति पर, गर्व है, युद्ध थोपा नया। नाश है, त्रास दें, मूढ़ भूले दया।। रोक दो, युद्ध को, श्याम आधार हो। हो विजय...
इस चंचल मन को
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इस चंचल मन को

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** हिरणी के इस चंचल मन को हवा वसंती महकाती। खिलता हरसिंगार चमन में, हम गाते गीत प्रभाती।। सौरभ सरिता उर में बहती, खिलती आशा की कलियाँ। पिया कहे सिंगार सलौना, चाहत में डूबी अँखियाँ।। यादें लेतीं हैं अँगड़ाईं, मुस्कानें सब मदमाती। प्रणय वल्लरी झूम रही है, अंग-अंग यौवन छाया। सजा कुंतलों पर गजरा है, देख मदन भी बौराया।। प्रेम तूलिका लिखती पाती, भेद खोलकर हर्षाती। प्रीति हमारी यह मधुमासी, प्रिय मधुर मुलाकातें हैं।। संबंधों के गठबंधन में, भ्रमरों की बारातें हैं।। मधुरस छलके तृषित अधर से, धड़कन -धड़कन इतराती। प्रियतम तेरी बनी मेनका, आशाएँ आलिंगन की। मन राधा बन बैठा व्याकुल, राह तके अनुमोदन की।। लगती आग मिलन की ऐसी, प्रेम क्षितिज में इठलाती। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवास...
अंतिम तुमको मेरी पुकार
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अंतिम तुमको मेरी पुकार

राम राज सिंह उन्नाव (उत्तर प्रदेश) ******************** प्रणय-गीत अंतिम तुमको मेरी पुकार।। नवल विटप जो पीट हो रहा उसके तुम हो प्राण। नयन मेघ से आज करा दो अमिय प्रेम रस पान। प्रकृति सजाती निज आँगन में नित नूतन उद्यान। मेरे मन मधुवन में गुंजित किन्तु विरह का गान। आज विदाई की बेला है, द्वार खड़े है मेरे कहार।। अंतिम तुमको मेरी पुकार।।१।। प्रतिदिन पथ में पुष्प बिछाता साथ मधुर मुस्कान। औचक ही मै खिल जाता हूँ तुम्हे निकट ही जान। किन्तु मिलन वह एकाकी बस क्षण भर का अवधान। फिर उसी वेदना के क्रंदन का होता नित्य वितान। सुखद प्रणय की अभिलाषा में, जीवन रण न मै जाऊ हार। अंतिम तुमको मेरी पुकार ।।२।। मन में है छवि बसी तुम्हारी और तुम्हारा ध्यान। कभी तो होगा दुःख रजनी का मंगल एक विहान। स्वाति बूँद बिनु सीप सम अधर-कमल, मुख म्लान। आकर जीवन सुधा पिला दो बन वियोग वरदान। प्...
हे राम धरा पर आ जाओ
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हे राम धरा पर आ जाओ

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** हे राम धरा पर आ जाओ, प्रभु फिरती अकुलाई। खोई है मानवता जग ने, कली कली मुरझाई।। ‌ दानवता प्रभु खूब बढ़ी है, रक्षक बनकर आओ। संस्कार सब भूल गये हैं, आकर नाथ सिखाओ।। समरसता का पाठ पढ़ा दो, दूर करो कठिनाई। भ्रष्टाचारी पनप रहे हैं, भ्रष्टाचार मिटा दो। भय से हीन जगत् हो सारा, अत्याचार हटा दो।। अंत करो मन के रावण का, हर उसकी परछाई। राह प्रगति की खोलो सारी, हो संस्कृति संस्थापक। पोषित कर दो धर्म सनातन, प्रभु हो शांति उपासक।। राम-राज्य फिर से आ जाए, सुरभित हो अँगनाई। रघुकुल रीति निभाने वाले, प्रभु हो अन्तर्यामी। तकती राह अहल्या फिर से, दे दो दर्शन स्वामी।। कलियुग के सब कलुष दूर हों, मुक्तिधाम रघुराई । विनती करते रघुकुल भूषण, शरणागत आते हैं। वंदन अभिनंदन हैं प्रभुजी, रामचरित गाते हैं...
मॉं अम्बे गीत
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मॉं अम्बे गीत

शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" ग्वालियर (मध्यप्रदेश) ******************** मातु अम्बे करें नित्य आराधना। ध्यान तेरा धरें हम करें अर्चना। बुद्धि करदो विशद मॉं करें वंदना। नित नवल छंद कविता करें सर्जना। शीश रख दो वरद हस्त मॉं शारदे, छंद - निर्झर बहा दो करें याचना।। मातु अम्बे करें नित्य आराधना। ध्यान तेरा धरें हम करें अर्चना। जाह्नवी कर्म यमुना बहे संग में। मानसी शारदा संगमी अंग में।। तीर्थ संगम बना दें सफल शारदे, भाव से भारती माॅं करूॅं साधना।। मातु अम्बे करें नित्य आराधना। ध्यान तेरा धरें हम करें अर्चना।। आप से ही चले मातु संसार यह। है दुखी ये हिया मॉं करो प्यार है।। आप जननी जगत की हरो कष्ट सब, टूट जाऊॅं नहीं बाॅंह को थामना। मातु अम्बे करें नित्य आराधना। ध्यान तेरा धरें हम करें अर्चना।। परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" निवासी ...
प्रेम-कुमुदिनी
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प्रेम-कुमुदिनी

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** आग लगी तन मन में प्रियतम, व्याकुल उर मधुमास में। करें भ्रमर किलकारी उपवन, पागल हैं उल्लास में।। कली-कली मदमाती साजन, गंधिल भी हर डाल है। सम्मोहित करता वसंत है, आह्लादित सुर ताल है।। बहे प्रेम की मधुशाला तन, पिया मिलन की आस में। करें भ्रमर किलकारी उपवन, पागल हैं उल्लास में।। कंपित होते अधर हमारे, विरहाकुल हर रात है। नैन -प्रतीक्षा करते साजन, स्वप्न जगे क्या बात है।। बौराती है प्रेम- कुमुदिनी, सखियों के परिहास में। करें भ्रमर किलकारी उपवन, पागल हैं उल्लास में।। कुंतल की वेणी मुरझाई, चन्द्र वदन भी पीत है। खोया रंग कपोलों ने भी, रूठा दर्पण मीत है।। खड़ी द्वार बस अगवानी को, आने के विश्वास में। करें भ्रमर किलकारी उपवन, पागल हैं उल्लास में।। नैनों से निर्झर झरते हैं, चुप पायल झंकार भ...
नहीं मारो श्याम रंग पिचकारी
गीत

नहीं मारो श्याम रंग पिचकारी

शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" ग्वालियर (मध्यप्रदेश) ******************** नहीं मारो श्याम रंग पिचकारी, मोरी कोरी चुनरिया रंग डारी। श्याम हमसे करों ना बरजोरी, बरसाने की हम राधा गोरी। ग्वाल बाल सॅंग मारग में ठाढ़ो, भर पिचकारी तन-मन पें मारो, हाथ पकड़ मोरी वैंया मरोड़ी चुनरी कन्हैया ने फा डारी। नहीं मारो श्याम रंग पिचकारी, मोरी कोरी चुनरिया रंग डारी। आओ सखी मिल श्याम को घेरें, आज पकड़ लै फिर न छोड़ें, मल- मल रंग अबीर लगावें, आज निकालें जाकी रंग दारी। नहीं मारो श्याम रंग पिचकारी, मोरी कोरी चुनरिया रंग डारी। आज न में तोकूं छोड़ुंगी, प्रेम रंग से खूब रंगुंगी। छलिया तेरे संग चलुंगी, तेरी अदाओं पे बलिहारी, नहीं मारो श्याम रंग पिचकारी, मोरी कोरी चुनरिया रंग डारी। परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" निवासी : ग्वालियर (मध्यप्रदेश) रुचि : गद्य...
दर्शन को अँखियाँ प्यासी
गीत

दर्शन को अँखियाँ प्यासी

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** दर्शन को अँखियाँ प्यासी हैं, उर बसे मनमीत। चातक मन मेरा है व्याकुल, श्याम कैसी प्रीति।। मुझको नहीं दिन-रात चैना, है किशन संताप। चहुँओर दिखता है अँधेरा, हाथ थामो आप।। नित आचरण हो शुद्ध मेरा, दो प्रभु वरदान। कर क्षम्य सब अपराध मेरे, रख प्रभो कुछ ध्यान।। मीरा बनी भटकी किशन मैं, गा रही प्रभु गीत। चातक मन मेरा है व्याकुल, श्याम कैसी प्रीति।। पलकें बिछायें राह देखूँ, अब समझ लो पीर। सागर बिना प्यासी नदी मैं, अब नहीं है धीर।। चितचोर हो समझो प्रभो अब, श्याम हो आधार। मनमोहना दो मोक्ष मुझको, थाम लो पतवार।। जीवन सँवारों नाथ मेरा, भक्त की हो जीत। चातक मन मेरा है व्याकुल, श्याम कैसी प्रीति।। छोड़ मोह-माया सब आयी, बस तुम्हीं से आस। हूँ मूढ़मति पर दास तेरी, हो तुम्हीं विश्वास।। मिथ्या जगत कान्हा शरण लो, हो ...
भाई दूज
गीत

भाई दूज

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** कहे बहिन की प्रीति सदा ही, भइया रीति चलाते रहना। घर आयेगी रूठी बहिना, भइया नित्य बुलाते रहना।। बहिना का है प्रेम निराला, पावन जैसे गंगा धारा। रक्षक भाई है बहना का, नित दूजे पर तन-मन वारा।। जुग-जुग जिए बहिन का भाई, यह आशीष दिलाते रहना। घर आयेगी रूठी बहिना, भइया नित्य बुलाते रहना।। भाई दूज का पर्व है प्यारा, खुशी हजारों लेकर आता। मंगल पावन तिलक लगाती, बहिना को त्योहार सुहाता।। प्रेम सदा छलकाता भाई, अद्भुत ज्योति जलाते रहना। घर आयेगी रूठी बहिना, भइया नित्य बुलाते रहना।। जुग-जुग जिए बहिन का भाई, प्रभु से वर ये माँगे बहिना। सुख समृद्धि सदा घर आये, झोली खुशियों से प्रभु भरना।। कृष्ण सुभद्रा सी है जोड़ी, नेहिल अमिय पिलाते रहना। घर आयेगी रूठी बहिना, भइया नित्य बुलाते रहना।। ...