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गीत

मधु मिलन राग
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मधु मिलन राग

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** क्यों कलंकित लोग करते, हैं सदा अनुराग को। गा न पाती कोकिला है, मधु मिलन के राग को।। काँपती है हर कली भी, अब भ्रमर गुंजार से। तोड़ बंधन प्रीत के सब, झाँकते क्यों द्वार से।। कौमुदी कब तक बचेगी, दानवों के वार से। दग्ध हिय प्रतिबिम्ब तेरा, ताकता है बाग को। सुप्त फेरे प्रीत के हैं, हारती है दामिनी। ठग गया है काम तन को, है बिलखती कामिनी।। राह प्रियतम नित निहारे, प्रेम आकुल भामिनी, पूछती है केश वेणी। तन लगे इस दाग को रो रहा है देख अम्बर, टूटते विश्वास को। छल गया है चाँद छलिया, फिर मिलन की आस को।। दे रहे आवाज आँसू, जा रहे मधुमास को। नित गरल के घूँट पी कर, देखते बस झाग को।। परिचय : मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित...
थोथे सारे वादे निकले
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थोथे सारे वादे निकले

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** थोथे सारे वादे निकले, सच्चाई के लाले। आँखों बँधी लोभ की पट्टी, होते नित घोटाले।। उबड़-खाबड़ सड़क कोसती, व्यस्त सभी चौराहे। करें डामरीकरण प्रदर्शन, नाटक जब जी चाहे।। मन में क्षोभ हज़ारों लेकिन, ख़ुद ही दुश्मन पाले। टौल-टैक्स भारी ले-लेकर भरते रोज़ ख़ज़ाने। सड़क सुधरती कागज़ पर ही, काम सभी मनमाने।। सच्चाई पर मौन भीष्म बन, काम करें सब काले। दुर्घटनाएँ होतीं प्रतिदिन, रोतीं हैं माताएँ। थोड़े दिन आन्दोलन होते, चक्रव्यूह रचनाएँ।। अंधी नगरी चौपट राजा, बुनता रहता जाले। औरँगज़ेबी आदेशों से, दिल पर चले कुल्हाड़ी। गहरी चोट कुशासन देता, उलट-पुलट हर गाड़ी।। बस नीलामी आदर्शों की करते टोपी वाले। परिचय : मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. ...
पहरे बहुत, गुमी आजादी
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पहरे बहुत, गुमी आजादी

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** पंच तत्त्व निर्मित काया पर, पहरे बहुत, गुमी आजादी। क्षणभंगुरता जीवन का सच, भूला मन लिप्सा का आदी।। मोह-लोभ की महाव्याधि में, अतिवादी मानव जकड़ा है अहंकार के पिँजरे में मन, चेतन खो, बन सुआ खड़ा है।। काम पिपासा में है डूबे, आत्मबोध तज प्रभुतावादी। पंच तत्त्व निर्मित काया पर, पहरे बहुत, गुमी आजादी।। गठरी सिर पर रखे पाप की, जग में भटके नश्वर काया। मर्यादा की रेखा टूटी, छल जाती रावण-सी माया।। अमल दृष्टि छल भेद न पाती, याचक हैं याअवसरवादी। पंच तत्त्व निर्मित काया पर, पहरे बहुत, गुमी आजादी।। सत्यं-शिवम-सुंदरम भूला, परहित राह नहीं पहचानी। कर्म-फलन है सद्गति-दुर्गति, काल करे हरदममनमानी।। यम का पाश सदा है कसता, मनुज दीन रोता अवसादी। पंच तत्त्व निर्मित काया पर, पहरे बहुत, गुमी आजादी।।...
ऐ वतन, तुझपे जान लुटा जावां
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ऐ वतन, तुझपे जान लुटा जावां

इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" गोरखाना, नोहर (राजस्थान) ******************** ऐ वतन, तुझपे ... जान लुटा जावां, तेरी मिट्टी में मिल जावां... बन के खुशबू हवाओं .... में घुल जावां, तेरी मिट्टी में मिल जावां... तेरी मिट्टी में मिल जावां... सरहदें चूम कर जो अमर हो गए, देश के वास्ते विष जो पी कर गए। याद रखेगी सदा ये ज़मीं-...आसमां, खून उनका है इस देश की हर रवां! वही शोला दिलों में जला जावां, तेरी मिट्टी में मिल जावां... माँ के आंचल का हर एक वो ...लाड़ला, बलिदान दे कर बना देश का ...रखवाला। उनके चरणों की रज शीश पर धर के मैं, देश की शान पे खुद को मिटा ....जावां! हजारों अमर कथा वो सुना ....जावां, तेरी मिट्टी में मिल जावां... गुल बन के मैं खिल जावां... ऐ वतन, तुझपे जान लुटा जावां, तेरी मिट्टी में मिल जावां... परिचय :-  इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" उपनाम : "न...
चाँद
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चाँद

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** माता मुझको चाँद दिलाओ। तोड़ गगन से इसको लाओ।। मुझको लगता है यह प्यारा। अपनी माँ का बहुत दुलारा।‌ उसको मीठी खीर खिलाओ। रौशन करता है जग सारा। सबकी आँखों का है तारा।। उसके गुण बस गाते जाओ। साथ चले यह बनकर छाया। मनमोहक है सबको भाया।। उसे गोद में मातु सुलाओ। कभी घटे बढ़ मोटा होता। और कभी वह छोटा होता।। दावत पर घर उसे बुलाओ। परिचय : मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट पौत्री : निहिरा, नैनिका सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सतर्कता समिति जबलपुर की भूतपूर्व चेयरपर्सन। प्रकाशित पुस्तक : पंचतंत्र में नारी, ...
अब तक चले औरों की खातिर
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अब तक चले औरों की खातिर

विष्णु दत्त भट्ट नई दिल्ली ******************** अब तक चले औरों की खातिर अब खुद की खातिर चलना होगा। परिश्रम की राह पकड़कर साथ वक्त के ढलना होगा, मुँह ताकना छोड़ पराया अपने पैरों चलना होगा। चाहिए गर सुख का सूरज किरण-किरण अब जलना होगा, मीठे फल की चाह अगर है डाल-डाल ख़ुद फलना होगा। बाधाएँ आएँगी पथ में डटकर उनसे लड़ना होगा, आँधी आए चाहे तूफ़ां हर दौर में पलना होगा। दीपक जैसे तमस मिटाने तिल-तिल करके जलता है, राह दिखाने औरों को अब दीपक जैसे जलना होगा। औरों के हित हमने सोचो सूरत बदली नगर-शहर की, अब अपनी ख़ातिर मिलजुल कर हरेक गाँव बदलना होगा। अब तक चले औरों की ख़ातिर अब ख़ुद की खातिर चलना होगा। परिचय :- विष्णु दत्त भट्ट निवासी : नई दिल्ली शिक्षा : एम.ए है। घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रच...
जंतर-मंतर हार गया
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जंतर-मंतर हार गया

भीमराव 'जीवन' बैतूल (मध्य प्रदेश) ******************** लोकतंत्र के अंग-अंग से, छिन आखिर शृंगार गया। कपटी पासों के आगे फिर, जंतर मंतर हार गया।। नैतिकता का अंश न बाकी, चुनें हुए मुस्टंडों में। सिसक रहा है लोकतंत्र अब, हिटलर के हथकंडों में। मात्र कुतर्को के दम पर जो, इतना वक्त बिसार गया।। कटी गर्दनें प्रश्नों की फिर, लटक गई मीनारों पर। पहनाएँ हैं नये मुखौटे, धूल सने किरदारों पर।। अहंकार के नये शिखर पर, चढ़ने फिर सरदार गया।। भाँग धर्म की पीकर सारे, मूर्दें ही मदहोश मिले। अंधी श्रद्धा ने जुबान के, जाने क्योंकर होंठ सिले।। वर्तमान है बैसाखी पर, तन पर लकवा मार गया।। दौड़ रहा ढर्रे पर जीवन, जाने कितने बोझ लिए। मन ही मन लड़ने के उसने, शायद नुस्खे खोज लिए।। समझ तर्जनी की ताकत वह, सारा बोझ उतार गया।। परिचय :- भीमराव 'जीवन' निवासी : बैतूल मध्य प्रदेश घोषणा पत्र...
थोथे सारे वादे निकले …
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थोथे सारे वादे निकले …

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** थोथे सारे वादे निकले, सच्चाई के लाले। आँखों बँधी लोभ की पट्टी, होते नित घोटाले।। उबड़-खाबड़ सड़क कोसती, व्यस्त सभी चौराहे। डामरीकरण का नाटक बस, होता जब जी चाहे।। मन में क्षोभ हज़ारों लेकिन, ख़ुद ही दुश्मन पाले। टौल-टैक्स भारी ले-लेकर भरते रोज़ ख़ज़ाने। सड़क सुधरती कागज़ पर ही, काम सभी मनमाने।। सच्चाई पर मौन भीष्म बन, काम करें सब काले। दुर्घटनाएँ होतीं प्रतिदिन, रोतीं हैं माताएँ। थोड़े दिन आन्दोलन होते, चक्रव्यूह रचनाएँ।। अन्धी नगरी चौपट राजा, बुनता रहता जाले। औरँगज़ेबी आदेशों से, दिल पर चले कुल्हाड़ी। गहरी चोट कुशासन देता, उलट-पुलट हर गाड़ी।। बस नीलामी आदर्शों की करते टोपी वाले। परिचय : मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सु...
बरखा की बहार
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बरखा की बहार

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** ताल-तलैयां रीत गए थे नदियाँ भी थीं सूखी। बुझा-बुझा मन रहता था और काया भी थी रूखी।। बरखा की बूँदों से पर अब, मिला खुशी का खत है। बहुत दिनों के बाद सभी की खिली-खिली तबियत है।। कंठ शुष्क थे,जी घुटता था, बेचैनी मुस्काती। सारा आलम व्यथित हुआ था, साँसें भी थम जाती हरियाली धरती पर बिखरी, लगता सुखद सतत है। बहुत दिनों के बाद सभी की खिली-खिली तबियत है।। स्वेद बहा करता था निशिदिन पर अब जल साथी है। आसमान से अमिय बरसता, हर शय अब गाती है।। मौसम तो मनभावन लगता, हर पल उल्लासित है बहुत दिनों के बाद सभी की, खिली-खिली तबियत है।। बूँदें लाईं नवल सँदेशे, अमन-चैन के मेले। बच्चे नाव चलाते जल में, लिए हर्ष के रेले।। जीवन को नवरूप मिला, कृषक हुआ आनंदित है। बहुत दिनों के बाद सभी की खिली-खिली तबियत है।। परिचय ...
वंचनाओं की झड़ी है
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वंचनाओं की झड़ी है

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** वंचनाओं की झड़ी है, दूर पर अपना ठिकाना। ढूँढ़ता बेचैन मन है, गीत मनभावन सुहाना।। भोर उजली है नहीं अब, घोर तम हर ओर छाया। पीर किसको हम बताएँ बन कुहासा स्वार्थ आया।। रोज बनती तालियाँ तक, अब शिकारी का निशाना। घाट सब सूने पड़े हैं, शांत है चौपाल देखो। हिल रही बुनियाद सारी, आ गया भूचाल देखो।। नफ़रतों के गिद्ध घूमें, सोच कर पग को बढ़ाना। पश्चिमी आँधी चली है, हो रही निष्पात डाली। धूल में संस्कार सब हैं, तरो रहा बस बैठ माली।। आज वसुधा भी विकल है, देख नूतन यह जमाना। गाँव का सौन्दर्य फीका, शाख - पीपल रोज कटती। वृद्ध तुलसी काँपती है, भींत घर की रोज़ फटती।। आह भरता मन मयूरा, भूल कर जीवन तराना। परिचय : मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स...
भोले पंछी क़ैद किए सब
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भोले पंछी क़ैद किए सब

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** भोले पंछी क़ैद किए सब, निर्मम हुआ शिकारी। पश्चिम की चलती आँधी में, पूनम रातें कारी।। गईं काल के मुँह निष्ठाएँ, चुप दर्शक भी सारे। अंतहीन पीड़ा मानव की, घूम रही मन मारे। प्रजातंत्र की बलिहारी है, सोते खद्दरधारी। रोज़ समस्या नई खड़ी है, हृदय करें नित क्रंदन। उल्टी चली हवाएँ सारी, मरता प्यासा मधुवन।। पत्थर ही पत्थर राहों में, तपती सड़कें सारी। रही बदलती नित्य नीतियाँ, लुटती है रजधानी। नारों का हर तरफ़ शोर है, करते सब मनमानी।। चौसर के खेलों पर अब भी, लगे दाँव पर नारी। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट पौत्री : निहिरा, नैनिका स...
योग अपनाओ, रोग भगाओ
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योग अपनाओ, रोग भगाओ

इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" गोरखाना, नोहर (राजस्थान) ******************** योग अपनाओ, रोग भगाओ, जीवन को तुम महकाओ, तन को साजो, मन को माजो, खुशियाँ तुम अपनाओ। योग भगाए रोग... योग भगाए रोग... सुबह-सवेरे जब तुम उठना, ताजी हवा में श्वास तो भरना, 'सूर्य-नमस्कार' से दिन की शुरुआत तुम करना। आलस त्यागो, शक्ति जागो, योग पथ पर चल जाओ, योग भगाए रोग... प्राणायाम की शक्ति न्यारी, दूर हो व्याधि सारी, बीमारी अब हार मान ले, होगी जीत तुम्हारी। ध्यान लगाओ, मन को सजाओ, अंतर्मन में मुस्कुराओ, योग भगाए रोग... स्वस्थ काया, सात्विक माया, योग ही सबसे सच्चा, बुजुर्ग हो या युवा यहाँ पर, योग करे हर बच्चा। जग को जगाओ, सबको बताओ, योग की अलख जगाओ, योग भगाए रोग... योग भगाए रोग, जीवन को तुम महकाओ! परिचय :-  इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" उपनाम : "नोहरी" पिताजी का नाम : ...
कंचन मृग छलता है अब भी
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कंचन मृग छलता है अब भी

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** कंचन मृग छलता है अब भी, जीवन है संग्राम। उथल-पुथल आती जीवन में, डसती काली रात। जाल फेंकते नित्य शिकारी, देते अपनी घात।। चहक रहे बेताल असुर सब, संकट आठों याम। बजता डंका स्वार्थ निरंतर, महँगा है हर माल। असली बन नकली है बिकता, होता निष्ठुर काल।। पीर हृदय की बढ़ती जाती, तन होता नीलाम। आदमीयत की लाश ढो रहे, अपने काँधे लाद। झूठ बिके बाजारों में अब, छल दम्भी आबाद।। खाल ओढ़ते बेशर्मी की, विद्रोही बदनाम। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट पौत्री : निहिरा, नैनिका सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सत...
विषधरों को पालते हैं
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विषधरों को पालते हैं

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** विषधरों को पालते हैं, जो डुबोते प्रेम-बेड़े। आह भरती है गरीबी, और पैसा तन उधेड़े।। क्षीण होती आस है अब, गाज छाती पर गिरी है। प्रेम निष्ठा खो गयी सब, जेब स्वारथ से घिरी है।। बह रही तृष्णा हृदय में, काल के खाकर थपेड़े। जब चुनावी दौर आता, सैकड़ो उत्पात होते। चाल चलते हैं शकुनि- सी, नित नए आघात होते।। लालचों के शाल मिलते, जीत के फिर साथ पेड़े। कागजी अखबार निशदिन, खोलते दिन-रात पोलें। फिर धजी का साँप बनता, मूक बहरे बोल बोलें।। किस तरह सागर तरेंगे, जर्जरित नावों के बेड़े। चोंच लंबी मौत की है, रोग करता देख हमला। पैंतरा बदला सभी ने, हो रहा है नित्य घपला।। आपदा की ये सदी है, सुत पिता को हैं खदेड़े। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट ...
संकल्प
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संकल्प

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** एक नया संकल्प मनुज लो, मूल मंत्र को याद करो। आदर्शों की गंग बहाकर, सच्चाई आबाद करो।। बलवानी संकल्प सदा हों, उत्कर्षों की हो छाया। लक्ष्य ध्यान में रखकर मानव, जीवन में सबकुछ पाया।। दृढ़ प्रतिज्ञा श्रेष्ठ चुनो तुम, एक योग्य उस्ताद करो। निठुर नियति आघात बहुत हैं, हार नहीं लेकिन मानो। संघर्षों की डोर पकड़ लो, मंज़िल अपनी पहचानो। हर पड़ाव पर जय पाओगे, श्रम सीकर हो नाद करो। करो मनोरथ पूर्ण सभी तुम, सदाचार की हो माला। दूर रहो छल छद्म कपट से, ओढ़ दुशाला सत् वाला।। चिंतन रथ बैठो उत्साही, पूरी हर फ़रियाद करो। करो अध्ययन सद्ग्रंथों का, औरों की हर लो पीड़ा। पथ प्रशस्ति का होगा हासिल, आज उठा लो फिर बीड़ा।। सारा जीवन आनंदित हो, सदा उच्च संवाद करो। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" नि...
तिलचट्टे
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तिलचट्टे

भीमराव 'जीवन' बैतूल (मध्य प्रदेश) ******************** लगे बिलबिलाने तिलचट्टे, पाँव जमा के पक्के। नई दवा भी लगे खोजने, नेता हक्के - बक्के।। खोल लिए है सबने तरकश, तीखे लाँछन वाले। छेद रहे सपनों के तन को, लेकर निर्मम भाले।। अपने पिच पर लगा रहे सब, लंबे चौके-छक्के।। शतरंजी चालों पर भारी, राजा जी के घोड़े। नग्न पीठ पर लगे बरसने, तिकड़म वाले कोड़े।। इन कीड़ों पर फिर छल-छंदी, विष छिड़केंगे पक्के।। गली-गली में भेज दिए हैं, परचे लेकर प्यादे।। भक्तों को बैकुंठ दिखाने, करना तगड़े वादे।। इनके जेबों में डाले कुछ, काजू और मुनक्के।। क्रांतिकारियों के स्वागत में, सजी नई बन्दूकें। दमनकारियों के घर पहुँची, भरी बड़ी सन्दूकें।। छिप जायेंगे फिर तिलचट्टे, कल खाने को धक्के।। परिचय :- भीमराव 'जीवन' निवासी : बैतूल मध्य प्रदेश घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी य...
जय का वरण
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जय का वरण

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** विपदाओं से लड़कर, जय को तुम पा जाओ। मंज़िल होगी पास, सफलता गह हर्षाओ।। विपदाएँ तो नित ही मंगलगान सुनाती हैं। संघर्षों के भावों को, वे रोज़ जगाती हैं। जीवन हो खुशहाल, यही सबकी है चाहत, जो डर जाता उसको ही, वे रोज़ सताती हैं। साहस से प्रियवर तुम तो पूरे भर जाओ। मंज़िल होगी पास, सफलता गह हर्षाओ।। आपदाएँ कहती हैं बल को लेकर बढ़ना। एक नई गाथा को लेकर खुशियाँ गढ़ना। कभी न पीछे क़दम हटाना, कर्म यही है, अंधकार में उजियारे का वंदन करना। उल्लासित होकर प्रियवर मंगल बरसाओ। मंज़िल होगी पास, सफलता गह हर्षाओ।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए (इतिहास) (मेरिट होल्डर), एल.एल.बी, पी-एच.डी. (इतिहास) सम्प्रति : प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष इतिहास/...
डरे प्रश्न भी भूख-प्यास के
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डरे प्रश्न भी भूख-प्यास के

भीमराव 'जीवन' बैतूल (मध्य प्रदेश) ******************** डरे प्रश्न भी भूख-प्यास के, जिह्वा सके न खोल। हिटलर-सा हो गया घमंडी, दिल्ली का सेंगोल।। लगते हैं अब बागवान के, कातिल क्रूर इरादे।। मसल रहे हैं जब उपवन की, कलियाँ हिंसक प्यादे।। न्याय-देव को अब सत्ता की, बीन करे कंट्रोल।। जाल बनाने लगे हुए सब, मंचासीन जुलाहे।। भेड़ों को अब नित अफीम ही, चरा रहे चरवाहे। पत्रकारिता नैतिकता का, पहन न पाई खोल।। बटन दबाकर हुई अँगुलियाँ, खुद की ही हत्यारी। चोर उच्चकों के हाथों दी, घर की चौकीदारी।। कल की चिंता में 'जीवन' का, बिगड़ गया भूगोल।। परिचय :- भीमराव 'जीवन' निवासी : बैतूल मध्य प्रदेश घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्...
बैरन कोयल कूके प्रियतम
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बैरन कोयल कूके प्रियतम

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** बैरन कोयल कूके प्रियतम, प्रीति गगरिया छलकाती। कंगन खनकें नथनी डोले, सजनी चलती बलखाती।। अधर गुलाबी कंपन करते, कुंतल लट मुख पर आए। घूँघट पट से झाँके गोरी, छम-छम पायल झनकाए।। अल्हड़ यौवन ललचाता मन, चंचल चितवन शरमाती। प्रेम-वलय उर बगिया पलती, कलियाँ लेतीं अँगड़ाई। कत्थक करती मोहक मणियाँ, झूला झूले तरुणाई।। डाल-डाल मधुमासी डेरा, चतुर चमेली इतराती। करें सुवासित मस्त बयारें, गुल मकरंद लुटाते हैं। अठखेली करते भँवरे हैं, प्रेमिल उर मुस्काते हैं। मन में निश्छल प्रेम पला है, कामदेव छवि बहकाती। मनभावन गीतों की लड़ियाँ, रस पीयूष भरी प्याली। बौराते हैं बौर प्रीति के, कहती होठों की लाली।। प्रेम पताका फैली नभ तक, चूमे माथा लहराती। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य...
हिरणी के इस चंचल मन को
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हिरणी के इस चंचल मन को

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** हिरणी के इस चंचल मन को हवा वसंती महकाती। खिलता हरसिंगार चमन में, हम गाते गीत प्रभाती।। सौरभ सरिता उर में बहती, खिलती आशा की कलियाँ। पिया कहे सिंगार सलौना, चाहत में डूबी अँखियाँ।। यादें लेतीं हैं अँगड़ाईं, मुस्कानें सब मदमाती। प्रणय वल्लरी झूम रही है, अंग-अंग यौवन छाया। सजा कुंतलों पर गजरा है, देख मदन भी बौराया।। प्रेम तूलिका लिखती पाती, भेद खोलकर हर्षाती। प्रीति हमारी यह मधुमासी, प्रिय मधुर मुलाकातें हैं।। संबंधों के गठबंधन में, भ्रमरों की बारातें हैं।। मधुरस छलके तृषित अधर से, धड़कन -धड़कन इतराती। प्रियतम तेरी बनी मेनका, आशाएँ आलिंगन की। मन राधा बन बैठा व्याकुल, राह तके अनुमोदन की।। लगती आग मिलन की ऐसी, प्रेम क्षितिज में इठलाती। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवास...
राम जन्म के आनंद में
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राम जन्म के आनंद में

महेश बड़सरे राजपूत इंद्र इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** आया है आया है राम जन्म उत्सव २... दिखलाया है दिखलाया है सनातनी वैभव 2... राम जन्म के आनंद में, रंग-रंग के फूल खिले। छोटा-बड़ा नही है कोई, एक दूजे से गले मिले।। उत्साह और उल्लास भरा, भाव सभी में छाया है.... आया है आया है राम जन्म उत्सव २ ... बाल वृद्ध और बहनें करते, रामचरित का पारायन। गली मोहल्ले गूंजे जयकारे, राम नाम का हो गुंजन।। प्यारा नाम रामचन्द्र का, सकल विश्व को भाया है..... आया है आया है राम जन्म उत्सव २ ... जब थे राघव प्रकट हुए, अवध बन गया साकेत धाम। देवी देवता आ प्रगटे थे, अदृश्य रूप में करने प्रणाम।। देख हरी को शिशु रूप में, बैकुंठ लोक मुसकाया है..... आया है आया है राम जन्म उत्सव २ ... भोगवाद की चकाचौंध में, मत फंसना ओ मतवालों। रखना है आदर्श राम का, ओ संस्कृति के रखवालो...
संकल्पों की फुलवारी
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संकल्पों की फुलवारी

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** कुलवंती दयमंती है वह घर की लक्ष्मी हर नारी। तीनों लोकों में यश उसका सारा जग है बलिहारी।। उर विशाल माँ दुर्गा जैसा, जगजननी कहलाती है। जन्मे गर्भ से देवता हैं, धरती स्वर्ग बनाती है।। साहस करुणा की हे देवी, अभिनंदन है अवतारी। आशा है विश्वास वही है, दिव्य शक्ति है कल्याणी। जगत् को संजीवनी देती, मधुरस पूरित है वाणी।। सब रूपों में पूजित नारी, देखो सब पर है भारी। अपना धर्म निभाती हँसकर, पीर जगत् की हरती है। कर्म करे श्रद्धा से अपना, धरा उर्वरा करती है।। चहुँदिशि जय-जयकार उसी की, संकल्पों की फुलवारी। कीर्तिमान नित नूतन रचती, ध्वजा प्रगति की फहराती। करती है उत्थान देश का, अंतरिक्ष तक वह जाती।। त्यागी लक्ष्मी स्वाभिमानिनी, दुर्गावती कहाँ हारी। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" न...
रामजन्म भयो अवध में
गीत

रामजन्म भयो अवध में

आशा जाकड़ 'आस' इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** चैत्र मास शुक्ल पक्ष शुभ नवमी आई, मध्यान बारह बजे शुभ समाचार लाई। अवनि से अंबर तक खूब ‌पुष्प है बरसाई। रामजन्म भयो अवध में खुशियांँ छाई।। रानी कौशल्या गोदी में ललनवा सुलाएं राजा दशरथ सिरहाने खड़े मंद मुस्काए कैकेई और सुमित्रा उनको दे रहे बधाई। राम जन्म भयो अवध में खुशियांँ छांई।। सखियांँ आवें, ताली बजा मंगलाचार गावें ढोलक बजाकर, हर्षित बधाई गीत गावें। नृप दशरथ बाँट रहे थाल भर-भर मिठाई। राम जन्म भयो अवध में खुशियांँ छाई।। समाचार सुन वशिष्ठ जी राजमहल आए राम की जन्म-कुंडली सबको सुनवाएं। हर्षित राजा वशिष्ठजी के चरणन पुजाई। राम जन्म भयो अवध में खुशियांँ छाई।। अयोध्या में सर्वत्र ढोल-ताशे बज रहे, घर-घर ढोलक, झांझ-मजीरे बज रहे। राजमहल द्वारे बज रही तुरई-शहनाई। राम जन्म भयो अवध खुशियांँ छाई।। बंदनवार सज रहे, मं...
आज क्यों
गीत

आज क्यों

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** बात पर, आज क्यों, बंधु देखो अड़े। दुश्मनी, है बढ़ी, प्राण लेने खड़े।। है चकित, यह धरा, शांत आकाश है। रो रहे, खग सभी, हो रहा नाश है।। वीर जो, थे बहुत, पार्थ साथी थके। मित्र के, सारथी, क्रुद्ध होके रुके।। स्वार्थ में, क्रूर हो, वीर योद्धा लड़े। नित्य बम, फेंकते, दुष्ट शैतान हैं। ताकतें, चीख कर, ले रहीं जान हैं।। लक्ष्य है जीत का, बंध सब टूटते। उर चुभे, शूल हैं, बंधु हैं छूटते।। आज तो, शर्म से, वीर सारे गड़े। है नियति, यह निठुर, पार्थ भी जानते। भाग्य में, जो लिखा, वो हुआ मानते।। धर्म ही, कर्म है, युद्ध पर काल है। कौरवों, पाँडवों, का बुरा हाल है।। मर रहे, युद्ध में, आज छोटे बड़े। शक्ति पर, गर्व है, युद्ध थोपा नया। नाश है, त्रास दें, मूढ़ भूले दया।। रोक दो, युद्ध को, श्याम आधार हो। हो विजय...
इस चंचल मन को
गीत

इस चंचल मन को

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** हिरणी के इस चंचल मन को हवा वसंती महकाती। खिलता हरसिंगार चमन में, हम गाते गीत प्रभाती।। सौरभ सरिता उर में बहती, खिलती आशा की कलियाँ। पिया कहे सिंगार सलौना, चाहत में डूबी अँखियाँ।। यादें लेतीं हैं अँगड़ाईं, मुस्कानें सब मदमाती। प्रणय वल्लरी झूम रही है, अंग-अंग यौवन छाया। सजा कुंतलों पर गजरा है, देख मदन भी बौराया।। प्रेम तूलिका लिखती पाती, भेद खोलकर हर्षाती। प्रीति हमारी यह मधुमासी, प्रिय मधुर मुलाकातें हैं।। संबंधों के गठबंधन में, भ्रमरों की बारातें हैं।। मधुरस छलके तृषित अधर से, धड़कन -धड़कन इतराती। प्रियतम तेरी बनी मेनका, आशाएँ आलिंगन की। मन राधा बन बैठा व्याकुल, राह तके अनुमोदन की।। लगती आग मिलन की ऐसी, प्रेम क्षितिज में इठलाती। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवास...