Friday, March 6राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

गीत

वोट बैंक के खाते से
गीत

वोट बैंक के खाते से

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** वोट बैंक के खाते से बस, खेलें नेता होली है। अवसरवादी राजनीति में, रोज़ पदों की डोली है।। धुत्त नशे में अब नेता हैं, कालिख मुख गद्दारी की। हुड़दंगी दल बदलू नाचें, हद होती मक्कारी की।। ढोल -मजीरे स्वयं बजाती, बड़ी प्रजा यह भोली है। घर-घर राजदुलारे जाते, भूल गये सब मर्यादा। दीप-तले ख़ुद अँधियारा है, कुचल गया चलता प्यादा।। फिरती झाड़ू उम्मीदों पर, लगे जिगर में गोली है। दल्लों की भरमार हुई है, आप जान लो सच्चाई । पिचकारी ई डी की चलती, रँगें जेल की अँगनाई।। मुखिया आँख बँधीं पट्टी है, शैतानों की टोली है। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति...
ऐसा बाग लगाओ माली
गीत

ऐसा बाग लगाओ माली

गिरेन्द्रसिंह भदौरिया "प्राण" इन्दौर (मध्य प्रदेश)  ******************** ऐसा बाग लगाओ माली, खुशबू बहे जमाने में। लूट सके सो जी भर लूटे कमी न पड़े खजाने में।। उड़ें तितलियाँ रंग बिरंगी, चिड़े चिड़ी डालों पर खेलें। मदमाते मधुकर कुछ गायें, पेड़ों से लिपटीं हों बेलें।। मद्धिम-मद्धिम चलें बयारें, मस्ती की झर उठें फुहारें, कोई कसर न रहे प्रेम की, परिभाषा बतलाने में।। ऐसा बाग .... ।।१।। थके पखेरू भली नींद लें, सुबह मिले कलरव सुनने को। थिरक उठे संगीत प्रीति का, गीत चलें सपने चुनने को।। महक उठे धरती का कण-कण, बीते मदिर राग में क्षण-क्षण, पत्ती-पत्ती खुली हवा में, लग जाए इतराने में।। ऐसा बाग .... ।।२।। कलियों को खिल जाने देना, फूलों को मुस्काने देना। जो भी आना चाहे साथी, खोलो फाटक आने देना।। चौकीदारों से कह देना, सबके कोप तलक सह लेना, कोई रोक-टोक मत...
संकल्प
गीत

संकल्प

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** संकल्पों को शीश झुकाकर, संस्कार को ग्रहण करो। सद्गुण की माला फेरो तुम, सत्कर्मों को वरण करो।। मर्दन करके सदा दंभ का, एक नया इतिहास गढ़ो। पौरुष से जीतो इस जग को, सत्य राह पर सदा बढ़ो।। कुंठित मन के भाव त्याग कर, नित उत्तम आचरण करो। अंतर्मन विश्वास जगा कर, साहस संयम धैर्य रहे। शोषित जन के दग्ध हृदय में, शीतल जल भी स्निग्ध बहे।। दीनों के तुम बनो मसीहा, तन की पीड़ा हरण करो। स्वारथ के बादल उमड़े हैं, मानवता की ज्योति जगा। चीर-हरण रोको धरती का, चंदन माटी माथ लगा।। दुष्ट दानवों का वध करके, वीरों का अनुसरण करो। मायावी आँधी को रोको, छल- प्रपंच से सदा बचो। निष्ठाओं की डोर पकड़कर, कोमल सुर संगीत रचो।। सद्भावों की बाजे सरगम, यह प्रण तुम आमरण करो। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवास...
श्याम पधारो
गीत

श्याम पधारो

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** रक्षक बनकर श्याम पधारो, ले लो फिर अवतार। पावन भारत की धरती पर, अब जन्मो करतार।। घोर निराशा मन में छाई, मानव है कमजोर। काम क्रोध मद मोह हृदय में, थामो जीवन डोर।। शरण तुम्हारी कान्हा आए, तिमिर बढ़ा घनघोर। अब भी चीर दुशासन हरते, दुष्टों का है जोर।। सतपथ में बाधक बनते हैं, बढ़ते अत्याचार। गीता का भी पाठ पढ़ा दो, व्याकुल होते लाल। नैतिकता की दे दो शिक्षा, बन कर सबकी ढाल।। आनंदित इस जग को कर दो, चमकें सबके भाल। धर्म सनातन हो आभूषण, बदले टेढ़ी चाल।। राग छोड़कर पश्चिम का हम, रखें पूर्व संस्कार। त्याग समर्पण पाथ चलें नित, हमको दो वरदान। शील सादगी को अपनाकर, नित्य करें उत्थान। सत्य निष्ठ गंम्भीर बनें हम, दे दो जीवन दान। जीवन सार्थक कर लें अपना, कृपा करो भगवान।। मर्यादा के रक्षक प्रभु तुम, ...
भारत माता का वंदन
गीत

भारत माता का वंदन

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** अंधकार में हम साहस के, दीप जलाते हैं। आज़ादी के मधुर तराने, नित हम गाते हैं।। चंद्रगुप्त की धरती है यह, वीर शिवा की आन है। राणाओं की शौर्य धरा यह, पोरस का सम्मान है।। वतनपरस्ती तो गहना है, हृदय सजाते हैं। आज़ादी के मधुर तराने, नित हम गाते हैं।। अपना सब कुछ दाँव लगाकर, जिनने वतन बनाया। अपने हाथों से अपना ही, जिनने कफ़न सजाया।। भारत माता की महिमा की, बात सुनाते हैं। आज़ादी के मधुर तराने, नित हम गाते हैं।। आगे बढकर, निर्भय होकर, जिनने फर्ज़ निभाया। वतनपरस्ती का तो जज़्बा, जिनने भीतर पाया।। हँस-हँसकर जो फाँसी झूले, वे नित भाते हैं। आज़ादी के मधुर तराने, नित हम गाते हैं।। सिसक रही थी माता जिस क्षण, तब जो आगे आए। राजगुरू, सुखदेव, भगतसिंह, बिस्मिल जो कहलाए।। ब्रिटिश हुक़ूमत से टकराकर, प्राण गँवाते हैं। ...
भोले पंछी
गीत

भोले पंछी

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** भोले पंछी क़ैद किए सब, निर्मम हुआ शिकारी। पश्चिम की चलती आँधी में, पूनम रातें कारी।। गईं काल के मुँह निष्ठाएँ, चुप दर्शक भी सारे। अंतहीन पीड़ा मानव की, घूम रही मन मारे। प्रजातंत्र की बलिहारी है, सोते खद्दरधारी। रोज़ समस्या नई खड़ी है, करता हृदय क्रंदन। उल्टी चली हवाएं सारी, मरता प्यासा मधुवन। पत्थर ही पत्थर राहों में, तपती सड़कें सारी। रही बदलती नित्य नीतियाँ, लुटती है रजधानी। नारों का हर तरफ़ शोर है, करते सब मनमानी।। चौसर के खेलों पर अब भी, लगे दाँव पर नारी। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट पौत्री : निहिरा, नैनिका सम्प्र...
रिमझिम बारिश
गीत

रिमझिम बारिश

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** रिमझिम बारिश अच्छी लगती, छप-छप बोल कहानी सी। कागज की नावें चलती थ़ी, यादें गाँव सुहानी सी।। बचपन खेले गिल्ली डंडा, साथी संग निराले थे। पनघट बरगद अमराई थी, स्वप्न सभी मतवाले थे।। शंखनाद मंदिर में होते, थी मीरा दीवानी सी।। गूँजें घर-घर वेद ऋचाएँ, निष्ठा के उजियारे थे। पार लगाते जो सबको, ऐसे कूल किनारे थे।। शीतल छैंया पीपल की भी, देती सुखद निशानी सी। बातों में मिश्री घुलती थी, साथी गौरैया प्यारी थी। सजती थीं चौपालें निशदिन, पंचायत भी न्यारी थी।। स्वच्छंद हवा में उड़ने की, बातें हुईं पुरानी सी। कंचन बरसाते बादल थे, फसलें भी कुंदन थी। सौंधी सुगंध थी खेतों में, माटी भी चंदन थी।। मुस्काते थे हलधर मुखड़े, अधरों प्रेम निशानी सी। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (...
प्रेरणा
गीत

प्रेरणा

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** प्रेरणा माता पिता हैं, प्रेरणा गुरुवर हमारे। प्रेरणा माँ शारदे हैं, प्रेरणा बनते दुलारे।। प्रेरणा अनुराग देते, पेड़ पौधे ये निराले। पुष्प मोहक रँग बिरंगे, नित्य मन भरते उजाले।। झूमते मधुकर चमन में, यह प्रभाती खूब भाती। स्वप्न देखें हम मनोहर, साँझ सिंदूरी सजाती।। चाँद सूरज रोशनी दें, प्रेरणा देते सितारे। प्रेरणा संगीत बनती, ताल सरगम की कहानी। कोकिला की तान मीठी, मूक पीड़ा की निशानी। बह रही निस्वार्थ कल-कल, प्रेरणा देती ‌नदी है। मर्म जानो मित्र ज्ञानी, प्रेरणा देती सदी है।। प्रेरणा चहुँओर बसती, यह धरा कण -कण पुकारे। थरथराते होंठ प्रियतम, सावनी मनुहार करते। फिर सृजन विस्तार होता, तूलिका में रंग भरते।। घट विचारों से भरा है, लेखनी कविवर उठाओ। श्वेत पृष्ठों पर लिखो तुम, प्रीति उर मे...
अंबुज के मंजुल नैना
गीत

अंबुज के मंजुल नैना

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** अंबुज के मंजुल नैना रहते क्यों डरे-डरे। लोभी भौरें घूम रहे ताल शतदल से भरे। हृदय मेरा क्रंदन करे विटप -विटपी रो रहे। कंटक भरा प्रेम पथ है, बोझ जीवन ढो रहे।। नित होती पलकें गीली, विपद किससे हम कहे। मृदु कलियाँ कहतीं नभ से, क्यों जगत में विष बहे।। पीर कानन क्या बताएं, वृक्ष सूखे हैं हरे। कंचन हिरण ढूँढते हैं, मनुज है बौरा गया। रुदन धरती कर रही अब, क्यों नंद छौरा गया।। फीकी सब चमक-दमक है, लाश नित हम हो रहे। कलकंठी भी मौन हुई, पंछी सभी सो रहे।। मुखौटे ओढ़े सब खड़े आदमी चारा चरे। चली विरह की आँधी है, तड़पती भी मीन है। अपंग जीवन कहता है, फिर बजे क्यों बीन हैं।। घोर छाया है तिमिर की, शाम सुख की है ढली। उजाले चालें चल रहे, पथिक भी भूले गली।। आशा की कटती पतंग, शांत स्वर कहते खरे। ...
कौन बुझाये प्यास
गीत

कौन बुझाये प्यास

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** फटे-पुराने कपड़े उनके, धूमिल उनकी आस। जीवन कुंठित है अभाव में, खोया है विश्वास।। अवसादों की बहुतायत है, रूठा है शृंगार। अंग-अंग में काँटे चुभते, तन-मन पर अंगार।। मन विचलित है तप्त धरा है, कौन बुझाये प्यास। चीर रही उर पिक की वाणी, काॅंपे कोमल गात। रोटी कपड़ा मिलना मुश्किल, अटल यही बस बात।। साधन बिन मौन हुआ उर, करें लोग परिहास। आग धधकती लाक्षागृह में, विस्फोटक सामान। अंतर्मन भी विचलित तपता, कोई नहीं निदान। श्रापित होता जीवन सारा, श्वासें हुई उदास। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट पौत्री : निहिरा, नैनिका सम्प्रति : सेवानिवृत...
रात बीत गई
गीत

रात बीत गई

शकुन्तला दुबे देवास (मध्य प्रदेश) ******************** बीत गई रात काली फिर क्यों उदास है पूरब की और देख आ रहा प्रकाश है तू क्यों हताश हैं। जीवन के दो पहलू सुख और दुःख है। दुखों से लड़ लेगा तू मन में जो विश्वास है। पूरब की और ... कर्म की भी दो गति एक जीत दूसरी हार है। हार के भी जो हंस लें वही मानव आस है। पूरब की और .... एक क्षण मिलन दूसरा बिछोह है जीवन में पलता मोह है मोह से मुक्त हो यही सच्चा ज्ञान है। पूरब की और .... संकटों से मत डरो भर दो हुंकार तुम मुश्किलों को जीत लो ऐसा विश्वास हो तुम। संकटों को काट दे हो ऐसी धार तुम फिर क्यों निराश तुम पूरब की और देख आ रहा प्रकाश है।। परिचय :- शकुन्तला दुबे निवासी : देवास (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए. हिन्दी, समाज शास्त्र, दर्शन शास्त्र। सम्प्रति : सेवा निवृत्त शिक्षिका देवास। घोषणा : मैं यह प्रमाणित करत...
कलियुग की बलिहार
गीत

कलियुग की बलिहार

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** नारी अस्मत लूटते, बात बडी गंभीर। भूले नर संस्कार हैं, कैसी है ये पीर।। देख पुकारे द्रोपदी, खतरे में है लाज। दुःशासन हर ओर है, ठौर न मिलती आज। कलियुग की बलिहार है, कैसा है संसार। नारी विपदा में बड़ी, होता नित्य प्रहार।। मानवता अब रो रही, पाँव पडी जंजीर। नारी अस्मत लूटते, बात बडी गंभीर।। बने पुजारी वासना, दुश्मन है ये देह। अब समूल यह नष्ट हो, इनसे कैसा नेह।। काँप रही अब नार है, नाव पडी मझधार। दानव अब शूली चढें, जो धरती पर भार।। दया दृष्टि प्रभु जी करो, दृग से बहता नीर। नारी अस्मत लूटते, बात बडी गंम्भीर।। नर पिशाच ही अब करें, नारी का अपमान। संतति संस्कारित न हो, तो बोझ खानदान।। जब कुकृत्य बच्चे करें, दंडित हों हर बार। मात मिलेगी अब इन्हे, नारी की ललकार।। अबला से सबला बनी, नारी बहुत अधीर। ना...
कंचन मृग छलता है अब भी
गीत

कंचन मृग छलता है अब भी

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** कंचन मृग छलता है अब भी, जीवन है संग्राम। उथल-पुथल आती जीवन में, डसती काली रात। जाल फेंकते नित्य शिकारी, देते अपनी घात।। चहक रहे बेताल असुर सब, संकट आठों याम। बजता डंका स्वार्थ निरंतर, महँगा है हर माल। असली बन नकली है बिकता, होता निष्ठुर काल।। पीर हृदय की बढ़ती जाती, तन होता नीलाम। आदमीयत की लाश ढो रहे, अपने काँधे लाद। झूठ बिके बाजारों में अब, छल दम्भी आबाद।। खाल ओढ़ते बेशर्मी की, विद्रोही बदनाम। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट पौत्री : निहिरा, नैनिका सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सत...
बिखर रहे माला के मोती
गीत

बिखर रहे माला के मोती

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** देख-देख कर पीड़ा होती। बिखर रहे, माला के मोती।। तंत्र बना अब लूट तंत्र है, है बस्ती का मुखिया बहरा। गली-गली में दिखी गरीबी, कितने ही दर, तम है गहरा।। झूठ ठहाके लगा रहा है, सच्चाई छुप-छुपकर रोती। बहुतायत झूठे नारों की, मिलते हैं वादों के प्याले। कहते थे सुख घर आयेंगे, मिले पाँव को लेकिन छाले।। रोज बयानों के खेतों में, बस नफ़रत ही फसलें बोती। जाने कितनी ही दीवारें, मन से मन के बीच बना दी। बात किसी की कब सुनता है, मौसम हठी, ढीठ, उन्मादी।। उसकी बातें, उसकी घातें, लगता जैसे सुई चुभोती। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट पौत्री : नि...
आसमान खाली है
गीत

आसमान खाली है

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** आसमान खाली है लेकिन, धरती फिर भी डोले। बढ़ती जाती बैचेनी भी, हौले-हौले बोले।। चले चांद की तानाशाही, चुप रहते सब तारे। मुँह छिपाकर रोती चाँदनी, पीती आँसू खारे।। डरते धरती के जुगनू भी, कौन राज़ अब खोले। जादू है जंतर -मंतर का, उड़ें हवा गुब्बारे। ताना बाना बस सपनों का, झूठे होते नारे।। जेब काटते सभी टैक्स भी, नित्य बदलते चोले। भूखे बैठे रहते घर में, बाहर जल के लाले। शिलान्यास की राजनीति में, खोटों के दिल काले।। त्रास दे रहे अपने भाई, दिखने के बस भोले। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट पौत्री : निहिरा, नैनिका सम्प्रति : सेवानि...
मानवता के प्रहरी तुम हो
गीत

मानवता के प्रहरी तुम हो

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** मानवता के प्रहरी तुम हो, तीर्थंकर भगवान तुम। सत्य, धर्म के संरक्षक हो, न्याय, नीति का मान तुम।। गहन तिमिर तो हर्षाता अब, प्यार दिलों से गायब है। दौर कह रहा झूठा-कपटी, ही बनता अब नायब है।। करुणा को फिर से गहरा दो, महावीर तुम ताप हो। पावनता के उच्च शिखर हो, आप असीमित माप हो।। काम, क्रोध के प्रखर विजेता, अविवेकी को ज्ञान तुम। सत्य, धर्म के संरक्षक हो, न्याय, नीति का मान तुम।। इंद्रियविजेता, सत्यपथिक हो, दया-नेह के सागर हो। उच्च चेतना, नव विचार हो, मीठे जल की गागर हो।। भटक रहा है मानव उसको, तुम दिखला लो रास्ता। नहीं रखे जिससे मानव अब, अदम कार्य से वास्ता।। पाप कर्म के हंता हो तुम, युग को नवल विहान तुम। सत्य, धर्म के संरक्षक हो, न्याय, नीति का मान तुम।। महावीर हे! वर्धमान तुम, फिर से जगत जगा...
संत्रास ही संत्रास है
गीत

संत्रास ही संत्रास है

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** संत्रास ही संत्रास है, वक्ष पीटें हम खड़े। टूट कर बिखरा हृदय है, ठौर कोई अब कहाँ। अश्रु झरते हैं नयन से, मात्र मातम है यहाँ।। सूखे नातों के बल पर, किससे कौन अब लड़े। भाग्य को शनि-ग्रह लगा है, व्यथा कथा कौन कहे। शकुनि करें गुप्त मंत्रणा, पीर कितनी अब सहे।। भरा स्वार्थ से जग सारा, नयन लज्जा से गड़े। ग्रहण लगा है दिनकर को, कपटी उजाला छले। शक्ति आसुरी के कारण, पत्थर मोम बन गले।। व्याकुल प्यासे हैं चातक, मगर कितने खग अड़े।। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट पौत्री : निहिरा, नैनिका सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदे...
चौसर की यह चाल नहीं है
गीत

चौसर की यह चाल नहीं है

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** चौसर की यह चाल नहीं है, नहीं रकम के दाँव। अपनापन है घर- आँगन में, लगे मनोहर गाँव।। खेलें बच्चे गिल्ली डंडे, चलती रहे गुलेल। भेदभाव का नहीं प्रदूषण, चले मेल की रेल।। मित्र सुदामा जैसे मिलते, हो यदि उत्तम ठाँव। जीवित हैं संस्कार अभी तक, रिश्तों का है मान। वृद्धाश्रम का नाम नहीं है यही निराली शान।। मानवता से हृदय भरा है, नहीं लोभ की काँव। घर-घर बिजली पानी देखो, हरिक दिवस त्योहार। कूके कोयल अमराई में, बजता प्रेम सितार।। कर्मों की गीता हैं पढ़ते, गहे सत्य की छाँव। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट पौत्री : निहिरा, नैनिका सम्प्र...
भटकते युवक
गीत

भटकते युवक

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** भटक रहे हैं युवक राह से, करें शत्रु का वरण। अंधा युग रखता है जैसे, दलदल में नवचरण।। भूले रीति संस्कार को सब, भूले प्रणाम नमन। ज्ञान ध्यान की बात नहीं, उजड़ा आस का चमन।। मात-पिता का आदर नहीं, कहाँ मिलेगी शरण। भूले सभ्यता संस्कृति भी, करते बैठे नकल। राग आलापें सब विदेशी, नाम न लेते असल।। आचरण में खोट भी उनके, करते नारी हरण। नशे में डूबे नवयुवक अब, मूल्यों का बस पतन। मोल लेते कई बीमारी, करें होम यह बदन।। जिंदा जलते होश नहीं कुछ, दुखद सब समीकरण। तेज़ाबी माहौल हुआ सब, होती रहती जलन। नित दुर्घटना करें शहजादे, देखो बिगड़े चलन।। घिसटे पहियों में भविष्य फिर, हुआ मान भी क्षरण। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्...
फंटूस – बाल गीत
गीत, बाल कविताएं

फंटूस – बाल गीत

बृजेश आनन्द राय जौनपुर (उत्तर प्रदेश) ******************** बिना बात ही लगा ठहाके, आओ करें हम गप सटाके। खा बतासे, फोड़ पटाखे, फटी जींस पे नाच दिखाके। रंग जमाके, ढंग बनाके, हिप्पी जैसा, बाल बढ़ाके। चमक-चमाके, झनक-झनाके, आज करें हम, धमक-धमाके। इन पर, उन पर रोब लगाके, नदिया-पोखर, घूम-घुमाके। कंची-कंचा, तड़क-तड़ाके, पतँग उड़ाके, पेंच लड़ाके। दनक दनाके, रनक बनाके, मारें छक्का, बैट उठाके। अक्कड़-बक्कड़, लाल-बुझक्कड़, हमसे है ना कोई बढ़कर। सावधान! ना तुम टकराना, बड़े-बड़ों को दें हम टक्कर। झूल- झुलाके, पेंग बढ़ा के, गुल्ली प डंडा दें जमाके।। तोला-मासा और छटाकें, डेका-सेमी, पढ़ें-पढ़ाके। अंत-अक्षरी-बोल, रटाके, वीरगान की तान सुनाके। ढनक- ढनाके, टनक- टनाके, ढोल पे ताशा दे घुमाके।। परिचय :-  बृजेश आनन्द राय निवासी : जौनपुर (उत्तर प्रदेश) सम्मान : राष्...
महाकुंभ महिमा
गीत

महाकुंभ महिमा

प्रो. डॉ. विनीता सिंह न्यू हैदराबाद लखनऊ (उत्तरप्रदेश) ******************** गंगा जमुना और सरस्वती तीनों हैं इक साथ में तीनों नदियों का संगम है तीर्थ राज प्रयाग में १. उज्जवल श्यामल पानी मिलकर बहे निर्मल जल धारा कण -कण में है इसके अमृत, कितनों को है तारा ब्रह्मा-शिव का तेज समाया इस निर्मल जल धार में २.इस तीर्थ महिमा की गाथा वेदों ने है गायी यहाँ ऋषि और मुनियों ने हैं कितनी सिद्धियाँ पायीं ज्ञान मिले अध्यात्म जगे संगम के पुण्य प्रताप में ३. भारद्वाज मुनि का आश्रम यहाँ प्रभु राम जी आए थे माता सीता और लक्ष्मण संग में आशीष पाए थे प्रभु राम ने चरण पखारे इस निर्मल जल धार में ४. दरस परस कर महाकुंभ में पुण्य प्रताप जगा लो पावन इस जल की धारा में मन का मैल मिटा लो पाप कटे संताप मिटे इस पावन जल की धार में परिचय :- प्रो. डॉ. विनीता सिंह निवासी : न्यू हैदराबाद लखनऊ (उ...
होली फागुन का त्योहार
गीत, छंद

होली फागुन का त्योहार

राधेश्याम गोयल "श्याम" कोदरिया महू (म.प्र.) ******************** होली- छंद होली फागुन का त्योहार, फागुन आवे रंग जमावे चलत बसंती बयार........ होली फागुन का..... पतझरे पेड़ पल्लवित हो रहे, बागों में फूल प्रफुल्लित हो रहे। महुए मद में रहे गदराए, आई अमराई में बहार........ होली फागुन का...... सरसों पीली फूल रही है, गेहूं की बाली झूल रही है। लाली पलास की मन को मोहे, किया सृष्टि ने श्रंगार........ होली फागुन का....... नव यौवन मन में हरशावे, होली को आनंद मनावे। एक दूजे पर रंग डाल, करे खुशियों का इजहार........ होली फागुन का....... पेड़ों को कटने से बचाए, पर्यावरण को स्वच्छ बनाए। डाल बुराई सब होली में, जलाएं होली अबकी बार......... होली फागुन का त्योहार फागुन आवे रंग जमावे चलत बसंती बयार। होली फागुन का त्योहार। परिचय :- राधेश्याम गोयल "श्याम" निवासी - कोदरिया म...
आई है होली
गीत

आई है होली

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** मुख पे लाल गुलाल लगाने, आई है होली। तन की सारी पीर मिटाने आई है होली।। हाथ गुलाल अबीर रखी है, पुलकित गोपाला। राधे पर है जादू डाला, कान्हा काला।। गंधिल होता गात गोपियाँ, भरतीं किलकारी। सपने लाख सँजोती मन में, आँखें कजरारी।। वादे सारे आज निभाने, आई है होली। रंग बिरंगे सुमन खिले हैं, नवरंगी छाया। मारे कलियों को पिचकारी, भौंरा बौराया।। हर्ष उल्लास की होली है, फागुन है भाता। यौवन और बुढ़ापा दोनों, गीत मिलन गाता।। हमजोली पर प्रेम लुटाने, आई है होली। है त्योहार अनूठा साजन, प्रेमिल अभिलाषा। कंचन जैसा रूप चमकता, कहता मन भाषा।। धरती पर यौवन छाया है, रसिया नभ छैला। प्रमुदित किंशुक है उपवन में, मिलती है लैला अंतर्मन कचनार खिलाने, आई है होली। बरजोरी करते हुरियारे, प्रणय-मुरारी हैं। ग्रामों की चौपालो ...
शहीद दिवस पर नमन
गीत

शहीद दिवस पर नमन

राधेश्याम गोयल "श्याम" कोदरिया महू (म.प्र.) ******************** मुक्तक: असर खुशबू का जेहनों से उड़ाया जा नही सकता, शहीदों की शहादत को भुलाया जा नही सकता। वतन के वास्ते जो मर मिटे है, हक की राहों में, कभी उपकार को उनके भुलाया जा नही सकता। गीत: कोटि नमन माताओं को थे, जिनके तीनो लाल, कर गए कैसे-कैसे कमाल। हंसते-हंसते फांसी चढ़ गए, किया न तनिक मलाल, बन गए अंग्रेजो के काल। भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव, जिनके थे प्रेरक अर्जन देव। मन में था, राष्ट्र प्रेम सदैव, जिनको था, प्यारा सत्य मेव। वंदे मातरम बोल वतन पे तीनो हुए निहाल..... कर गए कैसे-कैसे कमाल जिन्हे था चढ़ा बसंती रंग, स्वराज की पी गए ऐसी भंग। नशे में हो गए मस्त मलंग, ठानली अंग्रेजो से जंग। सांडर्स को बे मौत जा मारा, बदला लिया निकाल... कर गए कैसे-कैसे कमाल हुकूमत बरतानिया घबराई, सांडर्स की मौत से थी खि...
बिकती सच्चाई
गीत

बिकती सच्चाई

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** कलियुग में बिकती सच्चाई, झूठ कपट भी भारी है। तृष्णा के गहरे सागर में, जाने की तैयारी है।। खेले खेल सियासत भी अब, कालेधन की है माया। खींचें टाँग एक दूजे की, सत्ता लोलुप है काया।। बस विपक्ष की पोल खोलना, नई नीति सरकारी है। दौड़ सीट हथियाने की है, देते पद की सौगातें। भ्रष्टाचार प्रमुख मुद्दा भी, राम राज्य की हैं बातें। रंग बदलते गिरगिट जैसा, नेता खद्दरधारी है। गागर रीती है खुशियों की, भीगी अँखियाँ रमिया की। तोता मैना करते क्रंदन, रहती चिंता बगिया की।। करें देश को नित्य खोखला, जनता भी दुखियारी है। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट...