त्वदीयं नमः
अर्चना अनुपम
जबलपुर मध्यप्रदेश
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प्रणमामि आदि अनादि सदा
हे नाथ श्री वल्लभ वासुदेवा
अगम्य अगोचर विशेश्वर वराह
वमन मत्स्य कश्यप रूप धरा
चरण गंग साजे कंठम स्वरा..
हे नाथ श्री वल्लभ वासुदेवा..
राम मनोहर परशु बुद्ध रूपम्
सूर्यम् मयंक पावक प्रकाशम्
दुःख पाप नाशी क्षीरं निवासी
सदा भक्ति प्रीतम् प्रियम् अक्षरा
हे नाथ श्री वल्लभ वासुदेवा
वीरम च धीरम मिथक दोष घातम
भवसिंधु तारम् वरण बृंदिका
अधर देह सुन्दर भुजा चार धारम्
कल्याणकारी असुर मर्दणा
हृदय कुञ्ज स्वामी गौ पूजयामि
त्वदीयं नमामि चरण वंदना
प्रणमामि आदि अनादि सदा
हे नाथ श्री वल्लभ वासुदेवा
सवैया -
हम तो हरि मूरख देख के मूरत रीझत गावत आन पड़े..
यह नेह भी देह भी केवल रेह सी श्री चरणों में आन धरे
मुस्कान की तान के तीर किये गंभीर हिय जब आन धसे
तुम एक हमें हर एक से प्यारे बोलो प्रमाणित कैसे कर...









