अजर-अमर हैं अंजनि नंदन
अंजनी कुमार चतुर्वेदी
निवाड़ी (मध्य प्रदेश)
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बुद्धिमान तुम महाबली हो,
ज्ञानी गुणी कहाते।
स्वर्ण शिखर-सी देह आपकी,
बजरंगी कहलाते।
ज्ञान गुणों के सागर हो तुम,
अतुलित बल तन भरते।
रामदूत कहलाते हो तुम,
कष्ट सभी के हरते।
पवन पुत्र, हनुमान हठीले,
पवन वेग से जाते।
रक्त वर्ण फल समझ सूर्य को,
पलभर में खा जाते।
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता,
बल बुद्धि विद्या देते।
भय-बाधा, पीड़ा जीवन की,
पल भर में हर लेते।
अजर-अमर, तुम अंजनि नंदन,
दूर करो मम पीड़ा।
करने खोज, जानकी जी की,
लिया आपने बेड़ा।
ह्रदय आपके राम सिया हैं,
राम दूत बजरंगी।
संकट मोचन, कुमति निवारक,
सदा सुमित के संगी।
तेजपुंज महावीर आपको,
सीताराम हमारी।
सेवा भाव देख हनुमत का,
स्वयं राम बलिहारी।
दुर्गम काज जगत के जितने,
सभी सुगम हो जाते।
पाते हैं बैकुंठ, भक्त जन,
जो हनुमत गुण गाते...




















