प्रभात वंदना
संजय कुमार नेमा
भोपाल (मध्य प्रदेश)
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मेरे प्यारे कृष्ण कन्हैया,
अब तो बसो स्मृतियों में।
भक्ति मैं डूबा प्रभु,
श्री चरणों में रचे
बसाये रखना।
स्मृतियों की नैया में,
भवसागर से पार लगा देना।
प्रभात वंदना में,
अब कृष्ण कन्हैया आए।
प्रभु के अलौकिक दर्शन पाए,
मन को कितने हर्षाये।
स्मृतियों में डूबा
बैठा कुंज-गली में,
प्रभु के सुंदर दर्शन पाए।
प्रभात वंदना मैं मांगू वर,
प्रभु चरणों में
जीवन रमता जाए।
जीवन उपवन में
बजती रहे,
स्मृतियों की
मधुर मुरलिया।
खिलें पुष्प बगिया में,
खुश्बू बिखेरें स्मृतियों में।
प्रभु स्मृति भाव
बनाये रखना।
श्री चरणों में
बसाये रखना।
परिचय :- संजय कुमार नेमा
निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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