
रूपेश कुमार
(चैनपुर बिहार)
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(अभिनेता सुशांत सिंह की आत्महत्या पर)
इतनी-सी क्या देर हो गई तुझे,
तुम्हें आए कितना दिन हुआ,
ऐसे कोई थोड़े जाता है भला क्या,
ये जिंदगी कोई खेल थोड़े है,चौतीस यैवन देख चुके तुम,
क्या इतना ही ज्यादा हो गई,
इस छोटी-सी जिंदगी मे,
जीवन क्यों मजबूर हूई,अभी सारा जीवन बाकी था,
शुरुआत तो अब हुई थी,
दूसरे की हौसला देने वाले,
स्वयं क्यूँ तू हार गए तुम,इस नश्वर दुनिया मे तुम,
मौत को क्यूँ दोस्त बना लिए तुम,
अभी और अधियारा आता भी,
इतनें मे क्यूँ हार गए तुम,जीने का सलीका सिखाने वाले,
स्वयं सलीका भुल गए तुम,
युवा जीवन के पायदान पे चढ़ते,
दुनिया से क्यूँ रूठ गए तुम,सबके चेहरे पे हँसी लाने वाले,
स्वयं डिप्रेशन मे चले गए तुम,
इस बेखुदी दुनिया मे,
जीवन से हार गए तुम !
परिचय :- रूपेश कुमार छात्र एव युवा साहित्यकार
शिक्षा – स्नाकोतर भौतिकी, इसाई धर्म (डीपलोमा), ए.डी.सी.ए (कम्युटर), बी.एड (महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड यूनिवर्सिटी बरेली यूपी) वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी !
निवास – चैनपुर, सीवान बिहार
सचिव – राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान
प्रकाशित पुस्तक – मेरी कलम रो रही है
सम्मान : कुछ सहित्यिक संस्थान से सम्मान प्राप्त !
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