
अगर होते नहीं कंचन अगन में जल गए होते।
इंदौर। उक्त पंक्ति है श्री काव्य सागर साहित्यिक संस्था इंदौर (पंजी.) की मासिक काव्य गोष्ठी की है जो रविवार १ नवम्बर २० को द्वारकापुरी इंदौर के गार्डन में आयोजित की गई। इस आयोजन में शहर और आसपास के स्थानों से कई कवि शायरों ने उपस्थित होकर अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भरपूर आनंदित किया। आयोजन की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर जनाब हरीश साथी ने की तथा विशेष अतिथि का दायित्व कवि श्री दिनेश शर्मा जी ने निभाया। इस अवसर पर मेहमानों का स्वागत एवं संस्था द्वारा श्री दिनेश शर्मा जी का मध्यप्रदेश बीज निगम से सेवानिवृत्ति पर शाल श्री फल व स्मृति चिन्ह से संस्था अध्यक्ष श्री बृजमोहन शर्मा “बृज” द्वारा किया गया। आज के आयोजन में शायर श्री सुनील कुमार वर्मा मुसाफिर ने ग़ज़ल पढ़ी वो ही रूठ कर आज जाने लगे हैं, मनाने में जिनको ज़माने लगे हैं। श्री जय नारायण पाटीदार ने गीत सुनाया आषाढ़ की काली घटा बरसे बिना जब जाएगी।
श्री मनोहर लाल सोनी बाबा रचना पढ़ी, जो रखते बंद दरवाजा वो कहते हैं के तुम आओ। श्री आलोक रंजन ने गीत सुनाया वाटिकाएं काट के बहार ढूंढ़ते रहे उम्र बितती रही हम प्यार ढूंढ़ते रहे। कन्नौद से पधारे कवि श्री गजेन्द्र सोनी ने सुनाया गुरु की महिमा अपरंपार, गुरु ही शिक्षा का आधार। श्री हरीश साथी ने ग़ज़ल पढ़ी किसी के ईश्क में खो जाने को खोना नहीं कहते। श्री बृजमोहन शर्मा “बृज” ने ग़ज़ल पढ़ी, अगर होते नहीं कंचन अगन में जल गए होते, होते जो न फौलादी कभी के ढल गए होते, फरेबी हम जो होते झूठ का लेते सहारा तो, हमारे खोटे सिक्के भी जहां में चल गए होते। इस प्रकार और भी कई कवियों ने अपनी रचनाओं से आयोजन को गरिमा प्रदान की। इस अवसर पर श्री धर्मेन्द्र कोरी अम्बर, श्री बालक राम शाद श्री सुभाष गौरव, श्री संजय जैन बेजार श्री राहुल मिश्रा आदि ने भी अपनी रचनाओं का पाठ किया बढ़ी संख्या में श्रोताओं ने कविताओं का आनंद लिया। कार्यक्रम बहुत सफल रहा। कार्यक्रम का संचालन श्री जयनारायण पाटीदार ने किया आभार श्री मनोहर लाल सोनी बाबा ने माना। ये जानकारी संस्था सचिव जयनारायण पाटीदार ने दी।
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