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सुभाषचन्द्र बोस

अख्तर अली शाह “अनन्त”
नीमच
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देश सुरक्षित और सुखी हो,
इस हेतु जो खार बने।
हो चरित्र सुभाष का जिसमें,
अपना पहरेदार बने।।

युद्ध घोष ‘जय हिन्द” रहा है,
लोगों जिसका जीवन में।
देशभक्ति का रक्त रगों में,
कुर्बानी मन आंगन में।।
रही भूमिका जिसकी पावन
क्रांतिकारी परिवर्तन में।
कहां मरा जिंदा सुभाष है,
देखो आज हरेक मन में।।
ऐसे देशभक्त रहबर का,
सचमुच जो अवतार बने।
हो चरित्र सुभाष का जिसमें,
अपना पहरेदार बने।।

आजादी पे मरने वाले,
परवानों से प्यार करे।
आजादी की कीमत खूं है,
सच्चाई स्वीकार करे।।
हाथ उठा कर पदवी लेने,
वालों पर जो वार करे।
भ्रस्टव्यवस्था जिसे देखकर,
लोगों हाहाकार करे।।
स्वाधीनता प्यारी जिसको,
पराधीनता भार बने।
हो चरित्र सुभाष का जिसमें,
अपना पहरेदार बने।।

जहां कहीं भी रहे हमेशा,
बस माता का ध्यान रहे।
सोते जगते जिसके ख्वाबों,
में बस देश प्रधान रहे।।
हो न्योछावर तन-मन-धन से,
जननी की जो शान रहे।
दिल में दर्द रहे अपनों का,
अपनों पर कुर्बान रहे।।
वो “अनंत” अपना नेता हो,
अपना वो सरदार बने।
हो चरित्र सुभाष का जिसमें,
अपना पहरेदार बने।

परिचय :- अख्तर अली शाह “अनन्त”
पिता : कासमशाह
जन्म : ११/०७/१९४७ (ग्यारह जुलाई सन् उन्नीस सौ सैंतालीस)
सम्प्रति : अधिवक्ता
निवासी : नीमच जिला- नीमच (मध्य प्रदेश)


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