पारदर्शिता गर चाहते हो
राजेन्द्र लाहिरी
पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
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पतिव्रता मशीन की नीयत पर
संदेह रखना बेमानी है,
जरा याद करो अपने समय पर
तुमने भी की बहुत
सारी मनमानी है,
मानाकि आप फूंक-फूंक
कर कदम रखते थे,
आपकी करतूतें लोगों
को पता न होती थी
तो सबका स्वाद
शनैः शनैः चखते थे,
अपना गुनाह
स्वीकार नहीं रहे हो,
गर्वोक्ति पल
पाकर कितनों को
क्या क्या नहीं
किये और कहे हो,
आप अपनी करतूतें
भूल सकते हो
पर समय का पहिया
सब याद रखता है,
आप ऐसे भी नहीं रहे जो
गुनाह करने से कभी
भी झिझकता है,
मैं यह भी जानता हूं कि
ये जो आपके भाई बंधु है
जिसे अपना घोर
विरोधी बताते हो,
संवैधानिक तरीके
वालों के हाथ
चला न जाए सारी
व्यवस्थागत जिम्मेदारियां
तो दिन में कोस रात
में क्यों गले लगाते हो,
अपराध या ज्यादतियां करने वाला
भले ही भूल सकता है अपना कर्म,
मगर समय संजोये रहती सार...

