सम्राट अशोक
राजेन्द्र लाहिरी
पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
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बिंदुसार के पुत्र आपने
एकछत्र साम्राज्य बनाया था,
देश तो देश विदेशों में भी
अपना लोहा मनवाया था,
देख लहू की धार,
अपने मन को विचलित पाया था,
मन की शांति पाने खातिर
बुद्धत्व को अपनाया था,
लाखों स्तूप और शिलालेख
धम्म के लिए बनाया था,
हिंसा त्यागा अहिंसा अपनाया,
खुद का मन निर्मल बनाया,
आपने ही अथक प्रयत्न कर
बुद्ध राह सहेजा था,
पुत्र महेंद्र पुत्री संघमित्रा को
समुद्र पार तभी तो भेजा था,
शिक्षा लेने दुनियाभर से
हर वर्ष हजारों आते थे,
शिक्षा के संग शासन सुमता की
बातें लेकर जाते थे,
अशोक चक्र और
चार शेर चिन्ह को
देश ने यूं ही नहीं अपनाया है,
विदेशियों ने अपने ग्रंथों में
महान अशोक के निर्भीक
शासनकाल का गुण गाया है,
लड़ना नहीं है हमको अब तो
मिलकर एक हो जाना है,
अपना राज लाकर फिर से
प्रियदर्शी का ...

