जरा आगे बढ़कर तो देखो
राजेन्द्र लाहिरी
पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
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परंपराओं से आगे
ज़रा बढ़कर तो देखो,
पुरातन झंझावातों से
थोड़ा उबरकर तो देखो।
बदल दो उस व्यवस्था को,
जो रोकती हो
आगे बढ़ जाने से,
समय के साथ
कदमताल मिलाने से।
हर व्यवस्था समय के
साथ बदलती है,
हर युग अपनी नई
मान्यताएँ गढ़ती है।
यदि जकड़े रहोगे
बीते हुए विचारों में,
तो जड़ता किसी की भी
चेतना को ही कुतरती है।
पगडंडियों और
बैलगाड़ियों से निकलकर,
हम रेल और हवाई
सफ़र तक आ गए।
जिन्होंने समय
की चाल पहचानी,
वे दुनिया भर में
अपनी पहचान बना गए।
जब उड़ने को नए
पंख निकल आते हैं,
घिसी-पिटी राहें
फिर कहाँ सुहाते हैं।
जब व्यवस्था किसी
योग्य को ठुकरा देती है,
तभी एक नया
विचार जन्म लेता है,
और संभावनाओं का
नया आकाश देता है।
न्यूटन, डार्विन, आइंस्टीन
आज भी इसलिए याद हैं,
क्योंकि उनके विचा...

