Thursday, August 27राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

जीवित रहने के मायने

राजेन्द्र लाहिरी
पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
********************

हां देखा है मैंने लोगों को
जीवित रहने के लिए
करते हुए कवायद,
दुआओं से लेकर
अपने इष्ठों से करते खुशामद,

धन, दौलत, जमीन, घर व बर्तन,
सब बेच चाहते हैं रखना
स्वस्थ अपना तन-मन,

मंदिरों, मस्जिदों, चर्चों,
गुरुद्वारों के साथ ही
लगाते रहते हैं इस
डॉक्टर से उस डॉक्टर के
घर आंगन के निश दिन चक्कर,
शारीरिक, मानसिक,
आर्थिक रूप से डटकर,

सिर्फ बेहतर स्वास्थ्य के लिए,
इनके तन-मन की पीड़ा
किया जा सकता है महसूस,
नजर आते कोई प्रसन्न तो
लगते दिखते कई तो नाखुश,

क्या नहीं आता होगा
उनके मन में
अपनी इह लीला समाप्त
कर लेने का ख्याल,
संघर्ष कर उबरने का
मौका देता कुदरत बेमिसाल,

तो बताओ अरबों खरबों के
इस अमूल्य तन को
समाप्त कर लेने के लिए
हम खुदकुशी जैसा
वाहियात कदम उठाएं क्यों,
अपनी आंतरिक शक्ति
को कीजिए जागृत
और बन जाएं ज्यों का त्यों,
ताकि सबको समझ
आये जीवित रहने के मायने।

परिचय :-  राजेन्द्र लाहिरी
निवासी : पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर 98273 60360 पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु हमारे चलभाष क्रमांक 98273 60360 पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻

1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *