लहर का अनुमान
राजेन्द्र लाहिरी
पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
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बहुजनों की भीड़ देखकर
कभी भी न करें लहर का अनुमान,
बोलने से पहले दस बार सोच लो
वर्ना हो जाओगे बदनाम,
भीड़ का इस्तेमाल कैसे करें
इनको पता ही नहीं,
खैर इसमें इनकी कोई खता नहीं,
ये बहकावे में सबसे ज्यादा आते हैं,
अपने शक्ति का खुद मजाक उड़ाते हैं,
बाद में जिनका समर्थन किये
उनका पैर पकड़ गिड़गिड़ाते हैं,
वक्त रहते समझ नहीं पाते हैं,
सारी जिंदगी बेईमानी करने वाला
निर्णायक दिन ईमानदार बनता है,
रिश्वत के बदले दुश्मन को चुनता है,
एक विचारधारा के होते नहीं है,
खास सपने संजोते नहीं है,
विरोधी इन्हें भला लगता है,
अपना तो मनचला लगता है,
भूल जाता है प्रतिद्वंद्वी के विचार,
यादों से निकल जाता है
भूतकाल के शोषण और अत्याचार,
तो भीड़ देख न करें गुणगान,
धराशायी हो सकता है
लहर का अनुमान।
परिचय :- राजे...


