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अनकहे रिश्ते

रुचिता नीमा
इंदौर म.प्र.
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वो अनकहे से, अनदेखे से, वो अनसुलझे से रिश्ते
जो कभी बीच राह में,
तो कभी खयाल में बन जाते है।।

वो हकीकत से दूर, वो ख्वाबो की दुनिया के रिश्ते
लेकिन बड़े खूबसूरत से रिश्ते,
हर बार जीवन मे नई उमंग भर जाते है।।

राह चलते किसी अजनबी का यू मुस्करा जाना
जैसे उपवन में किसी खूबसूरत गुलाब का खिल जाना।।

वो बिना नाम, पहचान के रिश्ते,
वो दिल से जुड़े अनजाने से रिश्ते…

जब राह पर चलते किसी बुजुर्ग को मंजिल तक पहुचना हो
या किसी भूखे को पसन्द का खाना खिलाना हो
या कभी ला देनी हो किसी बच्चे के चेहरे पर मुस्कान
या दिला देना हो किसी कमजोर को सम्मान
भर जाता है मन में आत्म सम्मान

ये बिना नाम के क्षणिक से रिश्ते
ये जीवन के रंगों से लिपटे हुए रिश्ते
ये जीवन की ऊर्जा के रिश्ते
ये सब धर्मों से परे रिश्ते
ये बिना किसी स्वार्थ के रिश्ते
ये रिश्ते बहुत खूबसूरत है

ये अनकहे, अनजान से अजीब से रिश्ते इस दुनिया के
अजीब सी है रिश्तों की दुनिया
लेकिन बड़ी ही खूबसूरत है ये तरह तरह के रिश्तों की दुनिया

परिचय :-  रुचिता नीमा जन्म २ जुलाई १९८२ आप एक कुशल ग्रहणी हैं, कविता लेखन व सोशल वर्क में आपकी गहरी रूचि है आपने जूलॉजी में एम.एस.सी., मइक्रोबॉयोलॉजी में बी.एस.सी. व इग्नू से बी.एड. किया है आप इंदौर निवासी हैं।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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