
संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया
भोपाल (मध्यप्रदेश)
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जो शिक्षा दे, शिक्षक कहलाता।
शिक्षा की महिमा अपरंपार।
शिक्षक की गरिमा गाथा।
अति निराली इतिहास में प्रमाण।
शिक्षक वर्णों का ज्ञान प्रारंभ कर।
छात्रों को व्यापक ज्ञान की ओर।
ले जाता।एक प्रेरणा स्त्रोत बन।
प्रगति मार्ग पर प्रशस्त कर।
छात्र को कुम्हार सम गढ।
उसे लक्ष्य तक पहुंचाता।
शिक्षक अमूल्य ज्ञान प्रदाता।
रत्न है, जो अज्ञान चक्षु खोल।
ज्ञान का दिव्य प्रकाश देता।शिक्षक नैतिकता निधि नित।
प्रदान कर छात्रों को महापुरुष।
महावीर श्रेष्ठ गुण युक्त नागरिक।
निर्माण कर भारत राष्ट्र को।
सौंपता शिक्षक पुरातन।
काल से ही उत्तम चरित्रवान।छात्र प्रदान कर पर्वत सम।
बाधाओं से सामना करना।
सिखलाता, रामायण काल में।
राम और महाभारत काल में।
कौरव पांडव को विद्या।
प्रदान करने में वाल्मीकि, द्रोणाचार्य।
ॠषियो ने शिक्षक भूमिका।
निभा, प्रत्येक विद्या में निपुण।
बनाया था।शिक्षक अपनी त्याग, तपस्या में।
तप छात्रों को कुंदन सम बना ।
छात्र-जीवन चंदन, गुलाब की सुगंध से
महकाता स्वयं ज्ञान।
दीपक लौ बन छात्र के अज्ञान।
तिमिर को तिरोहित कर ज्ञान।
प्रकाश को आलोकित करता।
परिचय :- श्रीमती संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया
निवासी : भोपाल (मध्यप्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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