
प्रमेशदीप मानिकपुरी
भोथीडीह, धमतरी (छतीसगढ़)
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कर ले लाख दिखावा सब अपना होने का
जीवन के पल मे साथ हँसने और रोने का
जख्म अपनो का दिया अब भरता ही नहीं
एतबार भी अपनेपन का मै करता ही नहीं
दो दिन का है यहाँ रिस्तेदारों का जमघट
जाना पड़ता है सभी को अकेले ही मरघट
मरना अकेले ही कोई साथ मरता ही नहीं
एतबार भी अपनेपन का मै करता ही नहीं
क्या रखा है महज इस मिट्टी की काया मे
बना रखा है रिस्ते नाते मोह और माया मे
दिल के दरवाजे तक कोई पहुँचता ही नहीं
एतबार भी अपनेपन का मै करता ही नहीं
जाना अकेले है तो अकेले ही जीना सीखे
जीवन के अनुभव चाहे खट्टे हो या हो मीठे
बिना अनुभव जीवन सफर चलता ही नहीं
एतबार भी अपनेपन का मै करता ही नहीं
जीवन सफर है तो अब इसका मजा लेते है
इसके हर पल मे जीवन की नई सदा लेते है
जीवन सफऱ बिना संघर्ष के चलता ही नहीं
एतबार भी अपनेपन का मै करता ही नहीं
पिता : श्री लीलूदास मानिकपुरी
जन्म : २५/११/१९७८
निवासी : आमाचानी पोस्ट- भोथीडीह जिला- धमतरी (छतीसगढ़)
संप्रति : शिक्षक
शिक्षा : बी.एस.सी.(बायो),एम ए अंग्रेजी, डी.एल.एड. कम्प्यूटर में पी.जी.डिप्लोमा
रूचि : काव्य लेखन, आलेख लेखन, विभिन्न कार्यक्रम में मंच संचालन, अध्ययन अध्यापन
कार्य स्थल : शासकीय माध्यमिक शाला सांकरा
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