Sunday, January 11राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

‘विमलांजलि’- संवेदनशील मन की जीवन-यात्रा का संग्रह

समीक्षक- संजीव कुमार भटनागर

यमराज मित्र सुधीर श्रीवास्तव की पाँचवीं पुस्तक ‘विमलांजलि’ एक विहंगम और व्यापक काव्य-संकलन है, जिसमें ३०९ पृष्ठों में २१७ रचनाओं का अनुपम संगम पाठकों के समक्ष उनकी बहुमुखी साहित्यिक प्रतिभा को गहनता से प्रस्तुत करता है। सरलता लिए आकर्षक मुखपृष्ठ के पश्चात सम्पादन और प्रकाशन विवरण, तथा अपनी सासू माँ और अपनी मातृकुल को समर्पण – यह दर्शाता है कि कवि के हृदय में मातृ शक्ति के प्रति अगाध श्रद्धा और भावनात्मक निष्ठा है।
कवि अपनी “मन की बात” में मानवीय संवेदनाओं, मानव मूल्यों, रिश्तों में बढ़ती दूरियों और दम तोड़ती मर्यादाओं के कारण उत्पन्न असमंजस और चिंतन की पीड़ा को ईमानदारी से व्यक्त करते हैं। ममता प्रीति श्रीवास्तव की शुभकामनाओं और संक्षिप्त परिचय के साथ कृति का आरम्भ पाठक को जोड़ लेता है।
माँ शारदे की वंदना, गणेश स्तुति और गुरु वंदन से प्रारम्भ होकर यात्रा आगे बढ़ते-बढ़ते पिता पर केंद्रित गीतों से गुज़रती हुई अंत में माँ पर रची रचना “माँ को क्या लिखूँ” पर आकर भावपूर्ण पूर्णता प्राप्त करती है। यह क्रम ही दर्शाता है कि सुधीर जी का साहित्य संस्कार, श्रद्धा और कृतज्ञता की डोर से बँधा है।
कृति में प्रस्तुत विविध विषय कविता के व्यापक क्षितिज का अहसास कराते हैं-
अस्तित्व रक्षा और समय की मार से जूझता मन
भारतीय सैनिकों के प्रति गौरवपूर्ण समर्पण
भगवान महावीर के आदर्शों पर चिंतन
संस्कृति की खोज तथा स्मृतियों का पुनरावर्तन
समकालीन राजनीति पर सशक्त व्यंग्य
हास्य-रस में यमराज को “मित्र” बनाकर अनूठी प्रस्तुतियाँ
यमराज और कवि का संवाद, तथा हास्य-व्यंग्य के माध्यम से प्रस्तुत रचनाएँ सुधीर जी की विशिष्ट रचनात्मक क्षमता का परिचय कराती हैं।
महाकुंभ, धर्म तथा सामाजिक-आध्यात्मिक प्रश्नों पर रचित कविताएँ कवि की आध्यात्मिक दृष्टि को विस्तार देती हैं। वहीं भू-संरक्षण, शादी की परंपराएँ, जनसरोकार, और राजनीतिक विसंगतियों पर तिरछी नज़र – इस पुस्तक को यथार्थ से जुड़े साहित्य का सुंदर रूप देती है।
इतने व्यापक विषय और विविध रसों का समावेश होने के कारण यह कहना कठिन है कि प्रत्येक रचना पर अलग से टिप्पणी संभव है। फिर भी, प्रारम्भिक रचनाओं को पढ़ते ही एक बात स्पष्ट हो जाती है – पाठक निश्चित ही एक उत्तम और बहुआयामी साहित्य-सागर में गोते लगाने जा रहा है।
‘विमलांजलि’ केवल कविताओं का संग्रह नहीं, एक संवेदनशील मन की जीवन-यात्रा और साहित्य-साधना का सार्थक प्रमाण है। यह कृति हर उस पाठक के लिए मूल्यवान है जो भाव, विचार और सच को साथ लेकर वाक्-प्रवाह में डूबना चाहता है।

परिचय :- सुधीर श्रीवास्तव
जन्मतिथि : ०१/०७/१९६९
शिक्षा : स्नातक, आई.टी.आई., पत्रकारिता प्रशिक्षण (पत्राचार)
पिता : स्व.श्री ज्ञानप्रकाश श्रीवास्तव
माता : स्व.विमला देवी
धर्मपत्नी : अंजू श्रीवास्तव
पुत्री : संस्कृति, गरिमा
संप्रति : निजी कार्य
विशेष : अधीक्षक (दैनिक कार्यक्रम) साहित्य संगम संस्थान असम इकाई।
रा.उपाध्यक्ष : साहित्यिक आस्था मंच्, रा.मीडिया प्रभारी-हिंददेश परिवार
सलाहकार : हिंंददेश पत्रिका (पा.)
संयोजक : हिंददेश परिवार(एनजीओ) -हिंददेश लाइव -हिंददेश रक्तमंडली
संरक्षक : लफ्जों का कमाल (व्हाट्सएप पटल)
निवास : गोण्डा (उ.प्र.)
साहित्यिक गतिविधियाँ : १९८५ से विभिन्न विधाओं की रचनाएं कहानियां, लघुकथाएं, हाइकू, कविताएं, लेख, परिचर्चा, पुस्तक समीक्षा आदि १५० से अधिक स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर की पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित। दो दर्जन से अधिक कहानी, कविता, लघुकथा संकलनों में रचनाओं का प्रकाशन, कुछेक प्रकाश्य। अनेक पत्र पत्रिकाओं, काव्य संकलनों, ई-बुक काव्य संकलनों व पत्र पत्रिकाओं, न्यूज पोर्टल्स, ब्लॉगस, बेवसाइटस में रचनाओं का प्रकाशन जारी।अब तक ७५० से अधिक रचनाओं का प्रकाशन, सतत जारी। अनेक पटलों पर काव्य पाठ अनवरत जारी।
सम्मान : विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा ४५० से अधिक सम्मान पत्र। विभिन्न पटलों की काव्य गोष्ठियों में अध्यक्षता करने का अवसर भी मिला। साहित्य संगम संस्थान द्वारा ‘संगम शिरोमणि’सम्मान, जैन (संभाव्य) विश्वविद्यालय बेंगलुरु द्वारा बेवनार हेतु सम्मान पत्र।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *