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संस्कृत है हिंदी की जननी

संजय कुमार नेमा
भोपाल (मध्य प्रदेश)

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संस्कृत है हिंदी की जननी
यही भारत माता की पहचान।

विश्व भौतिकवाद से
परे हमारी हिंदी।

कई सुरों से निकाल कर,
जन-जन के अंतर मन का
भाव है हमारी हिंदी।

भारत माता के इस भाव का
तिलक करें, इसका सम्मान करें।

तुलसीदास, सूरदास कई
ऋषि मुनियों की
लेखनी हमारी हिंदी।

अंतर मन के भाव जागृत कर
सारे जग को ज्ञान हमारी भाषा देती।

हृदय से मिलाकर एक रखती,
पर चिंता यही अंग्रेजी भाषा
अब खंड-खंड कर चीर हरण कर रही।

करें प्रतिज्ञा हर दिन हर पल
हिन्दी दिवस मनाकर,
अपनी भाषा का सम्मान बढ़ाना है।

परिचय :- संजय कुमार नेमा
निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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