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हिंदी आत्मा में बस्ती

सुषमा शुक्ला
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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हिंदी आत्मा में बस्ती है,
संस्कारों की उजली हस्ती है।
माँ की लोरी, पिता का विश्वास,
मिट्टी की सोंधी खुशबू-सी पास
हर धड़कन में इसकी मस्ती है।

यह भाषा केवल शब्द नहीं,
यह भावों की निर्मल सरिता है।
आँसू बनकर भी चुपके बहती,
मुस्कान बन ओठों पर ठहरती
हिंदी जीवन की स्वर गीत है।

तुलसी की चौपाइयों में धर्म,
मीरा के पदों में प्रेम पुकारे।
रसखान की भक्ति में डूबी हुई,
कबीर की वाणी में सत्य जली
हिंदी युग-युग तक पथ रहे भली।

यह खेतों की हरियाली बोले,
यह श्रमिक के पसीने की गंध।
यह पर्वों की थाली सजाए,
यह त्याग, तपस्या का संदेश
जन-जन की आशा की है कंध।

जब तक आत्मा में प्राण बसे,
हिंदी का दीप जलता रहेगा।
समय बदले, दुनिया बदले,
पर संस्कृति का यह अमिट स्वर
हृदय-हृदय में पलता रहेगा।

परिचय :- सुषमा शुक्ला
निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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