
आशा शर्मा
धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश)
********************
मित्रों का जीवन में
क्या महत्व है।
कोई सोचे तो
सोचता रह जाता है।
जो किसी से भी नहीं मिला,
वो मित्र देता है।
पैसा भौतिक सुख,
और व्यापार देता है।
संबंध सामाजिक प्रतिष्ठा,
और सम्मान देते हैं।
माता-पिता से अनोखा प्यार
और स्नेह मिलता है।
निस्वार्थ भाव का समर्पण,
मात्र, माता-पिता ही देते हैं।
पृथ्वी पर उनका स्थान,
ईश्वर से भी
अधिक मूल्यवान है।
इसी प्रकार,
एक सच्चे मित्र,
का जीवन में होना,
सुरक्षा कवच होता है।
मित्रता पाना या देना,
इस भाव से हटकर
त्याग और समर्पण
प्रदान करती हैं।
संबंधों में एक
मर्यादा होती है।
परंतु मित्रता अपने
मित्र के लिए हृदय से
संबंध बनाकर जीती है।
बिना कहे हृदय को
स्पर्श कर, सुंदर
स्वर्णिम भाव संजोती है।
मित्रता में छल, कपट,
और ईर्ष्या जैसे कलुषित
भावों का कोई स्थान नहीं है।
भगवान श्रीकृष्ण ने
सुदामा की मित्रता को
जो सम्मान दिया
वह मित्र ही दे सकता है।
वह बड़ा ही धनवान
और भाग्यशाली है,
जिसके जीवन में,
सच्चा मित्र है।
बस अंत में यही कहना है,
मित्रता करना है तो
श्रीकृष्ण और सुदामा सी करें।
ना सुदामा ने मांगा,
और ना ही कृष्ण ने पूछा।
सुदामा के सम्मान को
आहत किए बिना जो
करना चाहिए वह किया।
एहसान नहीं मित्र का
कर्तव्य पालन किया।
ना अभिमान ना स्वार्थ,
बस निश्छल प्रेम और
विश्वास से भरा समर्पण।
यही है मित्रता जिसे
एक दिवस में
नहीं समेटा जा सकता है।
परिचय : आशा शर्मा
पति : श्रीहनुमान प्रसाद शर्मा
निवासी : धरमपुरी सांवेर रोड इंदौर (मध्य प्रदेश)
सम्प्रति : शिक्षिका हायरसैकैंडरी स्कूल
साहित्यिक परिचय : कविता, भजन, लघुकथा, लेख, आदि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। शिक्षण कार्य में निबंध लेखन किया है।
अन्य : विश्व रचनाकार मंच, शारदा साहित्य मंच, मनपसंद हास्य योग कला साहित्य मंच, शब्दसागर समूह, शुभ संकल्प समूह, आदि मंचों पर निरंतर लेखन कार्य। एवं पूर्व में आडियो कैसेट के लिए लेखन। अंतरराष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ अयोध्या मंच, पर संचालन, शुभ संकल्प समूह प्रकाशन से एवं अनेक मंचों से श्रेष्ठ लेखन के लिए सम्मानित।
प्रकाशन : “मैं कणिका मेरी कथा” आत्मकथा का प्रकाशन।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर 98273 60360 पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु हमारे चलभाष क्रमांक 98273 60360 पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻





















