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श्रीकृष्ण जीवन गान

12इंदौर (मध्य प्रदेश)
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सारे दुख दुनिया के,
पाए कृष्ण गोपाल ने।
सारे सुख दुनिया के,
चरणों में उस ग्वाल के।।

जनम हुआ कारागृह में,
संकट जिंदा रह जाने का।
काली रात और भारी वर्षा में,
यमुना से बच पाने का।।
वसुदेव ने पहुचाया गोकुल,
आनंद पाया नन्दलाल ने …
सारे…

रात दिवस सर के ऊपर,
मौतों का ही साया था।
लोगों की भय ग्रंथि को मिटाने ही,
वो तो आया था।।
एक एक करके सारे मारे,
राक्षस कंस कराल के …
सारे…

नंदगाँव के मुखिया के घर,
कमी होगी क्या राशन की?
ग्वाल बाल के लिए की चोरी,
दही, दूध और माखन की।।
बना लिया था अपना सबको,
गाँव के गाँव खंगाल के…
सारे…

कंस और चाणूर को मारा
बुरा नही कोई काम किया।
नरकासुर से मुक्त रानियों को
केवल अपना नाम दिया।।
शोधन करते रहे समाज का
एक से एक कमाल थे …
सारे…

मणी चोरी का आरोप सहा और,
असली चोर को खोज लिया।
रणछोड़ बने अपमान लिया,पर,
काल यवन को खत्म किया।।
सही समय सही काम किया,
वे कालों के भी काल थे…
सारे…

सुन्दर नगरी बसाई अद्भुत,
जिसे द्वारिका नाम दिया।
चमत्कार नहीं परिश्रम था वो,
दिन रात उन्होंने काम किया।।
मानवता के शत्रु कुचले
दुर्योधन और शिशुपाल से…
सारे…

पांडव से वीरों को परखा,
धर्म कार्य हेतु घिसने को।
धैर्य रखा चौदह सालों का,
संस्कृति हेतु पिसने को॥
दुर्योधन से मिले युद्ध में
सारथी बने कुंती के लाल के…
सारे…

जीवन जितना कष्ट भरा था,
उतना ही आनन्द भरा।
गीता कह दी भक्त पार्थ को,
द्वंद्व-मोह था सारा हरा।।
ज्ञान कर्म भक्ति संयम संग,
जीवन जियो सम्भाल के…
सारे…

सारे दुख दुनिया के,
पाए कृष्ण गोपाल ने।
सारे सुख दुनिया के,
चरणों में उस ग्वाल के।।

परिचय :- महेश बड़सरे राजपूत “इंद्रपुत्र”
निवासी :  इन्दौर (मध्य प्रदेश)
विधा : वीररस, देशप्रेम, आध्यात्म, प्रेरक, २५ वर्षों से लेखन
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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