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विश्वगुरु भगवान श्रीकृष्ण

अशोक कुमार यादव
मुंगेली (छत्तीसगढ़)

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(छत्तीसगढ़ी बोली)

ओदे आवत हे कन्हैया, बजावत बंसी।
झूम-झूम के नाचत हें, जम्मों यदुवंशी।।

पहिरे हे मोर मुकुट अउ बैजयंती माला।
संग म हवंय सुबल, बलराम, मधु ग्वाला।।

गोकुल के बन म, चरावत हे गाय-गरुवा।
कदम्ब रुख बइठे हे, मुरलीधर दुलरुवा।।

कान्हा के रूप ल देखके, राधा मोहागे हे।
मया के जादू म, तोला खोजत आगे हे।।

गोपी मन घलो रंग गेहें, पिरीत के रंग म।
रासलीला के बेड़ा म, थिरकत हें संग म।।

ब्रज म माखन अउ मिसरी के हवय भंडार।
चोरी करे बर आवत हे, जग के पालनहार।।

जमुना नदिया के तीर, खेलत हे मन-मगन।
नाग नथैया के पाँव छुए, कालिया के फन।।

बरसे जब करिया बादर, घपटे जब अंधियार।
गोबरधन परबत उठाके, करे तँय ह उजियार।।

कुरुक्षेत्र म गियान देके, देखाए रुप बिराट।
विश्वगुरु तोला कहिथें, जय हो! दीनानाथ।।

तँय तो अंतरयामी अस, कतका करँव बखान।
देबे आसीस हमन ल, किरपा करबे भगवान।।

परिचय : अशोक कुमार यादव
निवासी : मुंगेली, (छत्तीसगढ़)
संप्राप्ति : शिक्षक एल. बी., संस्थापक एवं अध्यक्ष यादव समाज सेवा, कला, संस्कृति एवं साहित्य उन्नयन समिति मुंगेली।
प्रकाशित पुस्तक : युगानुयुग
सम्मान : मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण ‘शिक्षादूत’ पुरस्कार से सम्मानित, उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान, छत्तीसगढ़ हिन्दी रत्न सम्मान, अटल स्मृति सम्मान, बेस्ट टीचर अवॉर्ड।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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