
माधवी तारे
लंदन
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आज के समय में समाज के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि युवा पीढ़ी का ध्यान सही दिशा में कैसे लगाया जाए। कई लोग विदेशी जीवनशैली को अपनाकर स्वयं को आधुनिक मानते हैं, किंतु इस कारण भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। हर घर में यह स्थिति दिखाई देती है कि कई बार वृद्धजनों की बात को युवा नहीं सुनते और दादा-दादी को पुराने जमाने का बता कर अनसुना कर देते हैं. लेकिन ऐसे समय में कई लोग और संस्थाएं ऐसी हैं जो हमारी सनातन परंपरा को बचाने के लिये सतत प्रयत्नशील हैं। महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा देने के लिये ये संस्थाएं जी जान लगा कर काम कर रही हैं। ऐसी ही एक संस्था है विश्वमांगल्य उसके एक सम्मेलन में सौभाग्य से मुझे आमंत्रित किया गया था। मांगल्य जैसा संस्कृत शब्द पढ़ कर वैसे भी मेरी जाने की इच्छा प्रबल हो गई थी। संस्था के दस साल पूरे होने पर एक कार्यक्रम श्रीनाथ मंदिर इंदौर में आयोजित किया गया था, देशभर में तीस एक संस्थाओं में इस मुद्दे पर काम हो रहा है।
कार्यक्रम में उपस्थित सुशिक्षित और प्रेरित महिलाओं को देखकर मुझे बहुत खुशी हुई और मन को शांति मिली की आज की पीढ़ी जागृत और समाज के लिये सोचते हुए काम करने वाली है। बातचीत के दौरान एक संस्था प्रमुख ने बताया कि उनकी संस्था मातृत्व और माता के लिये काम करती हैं, माताओं और बच्चों को अच्छा, सम्मानजनक जीवन मिले इसके लिये संस्था कार्यरत रहती है। उत्तर प्रदेश में एक महिला डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार के मामले में उन्होंने जानकारी दी कि संस्था की उत्तर प्रदेश शाखा ने तुरंत कार्रवाई करते हुए महिला के परिवार को मदद की।
इस संस्था में महिला पार्षद, डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सदस्य हैं और संस्था प्रमुख हैं। इन महिलाओं को देखकर गौरव की अनुभूति होती है कि इन्होंने न केवल अपने जीवन को सफल किया है बल्कि समाज की गरीब, परिस्थितिवश पीछे छूट चुकी महिलाओं के लिये हर संभव मदद देने की कोशिश भी कर रही हैं।
आज इसी बात की आवश्यकता है कि परिवार, समाज और शिक्षण संस्थाएँ मिलकर युवाओं को सही दिशा दें। उन्हें यह समझाया जाए कि आधुनिकता का अर्थ अपनी जड़ों से कट जाना नहीं है। सच्ची प्रगति वही है जिसमें ज्ञान, विज्ञान और तकनीक के साथ-साथ संस्कृति, चरित्र और मानवता भी सुरक्षित रहें। हमें भी उनके प्रयासों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सत्य, सदाचार और संस्कृति को स्थान देना चाहिए। यही हमारी पहचान है और यही आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ा मार्गदर्शन होगा।
परिचय :- माधवी तारे
वर्तमान निवास : लंदन
मूल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
अध्यक्ष : अंतर्राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच (लन्दन शाखा)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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