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सच्चा शिक्षक

राजेन्द्र लाहिरी
पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
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मेरी जाति जानने के इच्छुक
मेरे नन्हे विद्यार्थियों,
अब मैं तुम्हें रोज
नई बातें सिखाऊंगा,
जाति-पांति जरूरी या
मजबूरी नहीं बताऊंगा।
लील चुकी है इस
प्रश्न में छुपी भावनाएं
कई अबोध और
मासूम जिंदगियां,
इसने समाज को
केवल गरल ही दिया,
विभाजन की दीवारों को
अब मैं ढहाऊंगा।
न मैं अगड़ा हूँ,
न मैं पिछड़ा हूँ,
न मैं किसी ऊंचे-नीचे
भेद में बिखरा हूँ,
मेरी कलम, मेरा ज्ञान
ही मेरी पहचान है,
तुम्हारे भविष्य को
सँवारना ही मेरा ईमान है।
तुम्हें किताबों के अक्षरों से
आगे सोचना सिखाऊंगा,
भेदभाव की इस संकीर्ण
सोच से तुम्हें बचाऊंगा,
मानवता ही सबसे
बड़ा धर्म है इस जहाँ में,
तुम्हारे कोमल मनों में
यही अलख जगाऊंगा।
छोड़कर पीछे जात-पात
के हर झूठे बंधन को,
ज्ञान के प्रकाश से महकाऊंगा
तुम्हारे जीवन को,
कलम की ताकत से
नया इतिहास बनाऊंगा,
एक सच्चे शिक्षक का
फर्ज निभाउंगा।

परिचय :-  राजेन्द्र लाहिरी
निवासी : पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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