
मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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प्रीति तुम्हारी से आकुल यह,
हर्षित मेरा मन कर दो।
झुलस रहीं हूँ प्रेम-अगन में,
व्यग्र हृदय चंदन कर दो।।
प्रेम पयोधर घट सुधियों के,
सुधा कलश छलकाओ।
अपनी कस्तूरी सौरभ से,
यह जीवन महकाओ।।
तोड़ो सब तटबंध प्रीति के
प्रियतम सम्मोहन कर दो।
बहे प्रीति मकरंद हृदय में,
मन से तुम उसे निहारो।
बदन लाज से सकुचाता है,
नेह हमारा स्वीकारो।।
आकर बाँच प्रेम की पाती,
प्रिय शीतल लोचन कर दो।
लगा टकटकी पंथ तुम्हारा,
कब से मैं खड़ी निहारूँ।
मधुर मिलन हो तुमसे तब ही,
व्याकुल-सी देह सँवारूँ।
जन्म-जन्म तक रहे याद वह,
गठबंधन पावन कर दो।
ढाई आखर प्रेम पढ़ी हूँ,
जपूँ प्रेम की ही माला।
प्राण डालते प्रस्तर में तुम,
वैसा जादू कर डाला।।
प्रिय तुम संजीवन बूँटी बन,
रुचिकर फिर जीवन कर दो।
परिचय : मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम भट्ट
माता : स्व. सुमित्रा पाठक
पिता : स्व. हरि मोहन पाठक
पुत्र : सौरभ भट्ट
पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट
पौत्री : निहिरा, नैनिका
सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सतर्कता समिति जबलपुर की भूतपूर्व चेयरपर्सन।
प्रकाशित पुस्तक : पंचतंत्र में नारी, काव्यमेध, आहुति, सवैया संग्रह, पंख पसारे पंछी
सम्मान : विक्रमशिला हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा, विद्या सागर और साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा, विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि, गुंजन कला सदन द्वारा, महिला रत्न अलंकरण, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “उत्कृष्ट न्यायसेवा अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित तथा कई अन्य साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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