
प्रमेशदीप मानिकपुरी
भोथीडीह, धमतरी (छतीसगढ़)
********************जनम मरण के
बीच जो लकीर है
जीवन तो पूर्व
जन्म की ताबीर है
लो बीत गया एक वर्ष,
खट्टी-मीठी यादो संग
जीवन मे बिखरते कुछ
यादो और वादों संगकुछ जीवन से जो रीता है
कुछ ने सपनो को जीता है
जीना है हमें अब उन
सपनो के संग-संग
लो बीत गया एक वर्ष,
खट्टी मीठी यादो संगजो बिता उसे भुला भी दो
गम को सारे भूला भी दो
वर्तमान को बेहतर कर,
भर दो जीवन मे रंग
लो बीत गया एक वर्ष,
खट्टी मीठी यादो संगआना जाना जग मे
जैसे कोई पहेली हो
जन्म-मरण जैसे
एक दूजे की सहेली हो
मिला है जीवन, भरेंगे
उसमे नित नव-नव रंग
लो बीत गया एक वर्ष,
खट्टी मीठी यादो संगनया सवेरा, नया
उम्मीद आने को है
अपने अपनों के
साथ निभाने को है
समय की दरकार है रहना
अब अपनों के संग
लो बीत गया एक वर्ष,
खट्टी मीठी यादो संग
जीवन मे बिखरते कुछ
यादो और वादों संग
पिता : श्री लीलूदास मानिकपुरी
जन्म : २५/११/१९७८
निवासी : आमाचानी पोस्ट- भोथीडीह जिला- धमतरी (छतीसगढ़)
संप्रति : शिक्षक
शिक्षा : बी.एस.सी.(बायो),एम ए अंग्रेजी, डी.एल.एड. कम्प्यूटर में पी.जी.डिप्लोमा
रूचि : काव्य लेखन, आलेख लेखन, विभिन्न कार्यक्रम में मंच संचालन, अध्ययन अध्यापन
कार्य स्थल : शासकीय माध्यमिक शाला सांकरा
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