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जीवन एक प्रश्न

शिवदत्त डोंगरे
पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश)
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एक प्रश्न
जो हर मोड़ पर
नया हो जाता है
कभी धूप में
तप कर मजबूत
कभी ओस बनकर
पल में खो जाता है।

हम चलते हैं
मंज़िल की तलाश में
पर रास्ते ही हमें
पहचान देते हैं
कभी हार में
छिपा सबक
कभी जीत में नम्रता
सिखा देते हैं।

सत्य यह है कि
जीवन किसी ठहरे
पानी जैसा नहीं
यह बहती नदी है
जो पत्थरों से टकराकर
और भी निर्मल
और भी प्रखर
हो जाती है।

हम जिस क्षण को
पकड़ना चाहते हैं
वह हवा बनकर
फिसल जाता है
और जो क्षण हमें
तोड़ देता है
वही हमें नया
आकार दे जाता है।

अंत में समझ आता है
जीवन को
समझना नहीं
जीवन को
जीना पड़ता है
हर अनुभूति को
स्वीकार कर
खुद को धीरे-धीरे
प्रकाश की ओर
ले जाना पड़ता है।

परिचय :- शिवदत्त डोंगरे (भूतपूर्व सैनिक)
पिता : देवदत डोंगरे
जन्म : २० फरवरी
निवासी : पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश)
सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “समाजसेवी अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित
घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है।

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