
आनंद कुमार पांडेय
बलिया (उत्तर प्रदेश)
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नव वर्ष हमारा तब होगा,
खुशियों का आलम जब होगा।
कलियाँ कलियाँ मुस्काएगी,
कोयल भी गीत सुनाएगी।
नव पुष्प खिलेंगे बागों में,
वह शोभा मन को भाएगी।।
मौसम अपना भी गजब होगा,
नव वर्ष हमारा तब होगा,
ब्रह्मा ने सृष्टि का सृजन किया,
विक्रमादित्य को राज्य मिला।
विक्रमादित्य के नाम पर हीं,
विक्रमी संवत् शुभ नाम मिला।।
प्रकृति का रूप अजब होगा,
नव वर्ष हमारा तब होगा,
प्रभु राम का राज्याभिषेक हुआ,
जन जन का रक्षक नेक हुआ।
चैत्र नवमी का पहला दिन,
नव दुर्गा का भी प्रवेश हुआ।।
वह घड़ी जानिए जब होगा,
नव वर्ष हमारा तब होगा,
वन उपवन एक सदृश लगे,
जब स्वयं मनोरम दृश्य लगे।
हो स्नेह की बादल की वर्षा,
कोई ना जब अनभिज्ञ लगे।।
वह समय भी बहुत सुलभ होगा,
नव वर्ष हमारा तब होगा,
गुलाम किया जिसने हमको,
उसका हम पर्व मनाए क्यों।
जो हमें रुलाया वर्षों तक,
उसकी हम खुशी बढाए क्यों।।
उसे भूलना अब ना सहज होगा,
नव वर्ष हमारा तब होगा,
हिंदू नव वर्ष हमारा है,
बस सत्य सनातन धारा है।
सपनों का नया सबेरा वह,
आनन्द ने हृदय भी वारा है।।
सुख का इक नया सफर होगा,
नव वर्ष हमारा तब होगा,
परिचय :- आनंद कुमार पांडेय
पिता : स्व. वशिष्ठ मुनि पांडेय
माता : श्रीमती राजकिशोरी देवी
जन्मतिथि : ३०/१०/१९९४
निवासी : जनपद- बलिया (उत्तर प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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