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नया साल

राजेन्द्र लाहिरी
पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
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अमीर-अमीर होते जाएंगे
और गरीब और भी ज्यादा गरीब,
भरमाया मस्तिष्क कहेगा
है ये हमारा नसीब,
नहीं बदलेगा किसी
का सूरतो हाल,
ज्यादा उम्मीद मत पालना
अच्छा होगा नया साल,
खेल वही जारी रहेगा,
चालाक धर्म, जाति पाती
और अछूत कहेगा,
दुश्वारियों से जान नहीं छूटेगा,
लुटेरा खुलकर लूटेगा,
भाग्य मानने वालों
का भाग फूटेगा,
जहरीली हवाओं
से दम घुटेगा,
होगा वही लड़ाई
व मारकाट,
होगा हमेशा की
तरह बंदरबाट,
नेता विभिन्न
मुद्दे उछालेंगे,
सब लोग उधर ही
दिमाग डालेंगे,
विपक्ष अपना
खेल संभालेंगे,
प्रशासन सबका
तेल निकालेंगे,
हां पैसे वालों के लिए
होगी कुछ दिन खुशियां,
त्राहिमाम करते रहेंगे
जो है दीन दुखिया,
मन मस्तिष्क में
वहीं सड़ांध होंगे,
ऐसे ही लोग सभ्रांत होंगे,
बस इस गुजरते जैसा
न हो नया साल,
जिसका स्वागत किया
न बने जी का जंजाल।

परिचय :-  राजेन्द्र लाहिरी
निवासी : पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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