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गीता ज्ञान-जीवन निदान

मोहिनी गुप्ता
राजगढ़, ब्यावरा (मध्य प्रदेश)
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कुरुक्षेत्र – समर में दिया श्री कृष्ण ने अर्जुन को ज्ञान।
अज्ञान से ज्ञान की ओर “गीता ज्ञान – जीवन निदान”।

गीता के हर श्लोक में होती कुछ ज्ञान की बात।
समझ जाए जो नर नारी तो होता जीवन पार।

देते इक श्लोक में श्री कृष्ण अर्जुन को ये सीख।
नहीं इन्द्रियों के वश में रह कर कुछ कर्म उचित।

हो न्यायोचित कर्म और हो जगत का कल्याण।
रख दूर स्वयं को भोग इंद्रियों से कहना ये मान।

इंद्रियों से श्रेष्ठ मन और मन से भी श्रेष्ठ मानस।
मानस (बुद्धि) से भी श्रेष्ठ आत्मा जगत का सार।

आत्मा जो अजर – अमर है इंद्रियां तो स्थूल है।
न कभी मरती है और न ही कभी लेती जन्म है।

पा इंद्रियों पर विजय लगाए ईश आराधना में ध्यान।
उसका कर्म और जीवन हो जाता है सफल बारंबार।

हे पार्थ ! उठो ! अपने मन से निकालो भय।
कर विवेक का प्रयोग, करो न्यायोचित कर्म।

परिचय :- मोहिनी गुप्ता
माता : पुष्पा गुप्ता
पिता : पूनम चन्द गुप्ता
जन्म स्थान : कोटा (राजस्थान)
निवास : राजगढ़, ब्यावरा (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : सम्पूर्ण शिक्षा महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर और कोटा विश्वविद्यालय से प्राप्त की। एम.ए. (राजनीति शास्त्र), बी.एड . कोटा विश्वविद्यालय से एवं एम.ए. विनायका मिशंस यूनिवर्सिटी सेलम, तमिलनाडु से।
लेखन : हास्य, प्रेम, नारी, आध्यात्म और विभिन्न समसामयिक विषयों पर ये अपनी लेखनी चलाती आई है। बचपन से ही आपकी रचनाएँ अखबारों के साथ ही गृहलक्ष्मी जैसी विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं अनेक साझा काव्य संग्रहों और साझा कहानी संकलन में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। लेखन प्रारम्भ आपने हास्य विधा से आरम्भ कीया। कुकिंग और गार्डनिंग अपने यूट्यूब चैनल पर भी समयानुसार वीडियो बनाती है।
विधा : गद्य-पद्य दोनों ही शैलियों में हास्य, कविता, गीत, सायली, हाइकु, वर्ण पिरामिड, कहानी, लघुकथा, संस्मरण, विज्ञापन आदि।
आयोजन : हास्य प्रमुख के रूप में विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक मंचों पर इनके द्वारा हास्य आयोजन बहुत समय से किए जाते रहे हैं। साथ ही इनके द्वारा हिंदी भाषा के विकास और समृद्धि हेतु गद्य – पद्य विधाओं में भी कुशलतापूर्वक आयोजन आयोजित किए जाते रहे हैं।
सम्मान : “भारत रत्न अटल सम्मान २०२४” (लखनऊ में) समय-समय पर विभिन्न साहित्यिक सम्मानों द्वारा सम्मानित होती आई है।
प्रकाशित पुस्तक : हाल ही में एकल काव्य संग्रह पुस्तक “ओस की एक बूँद” प्रकाशित हुई है।

घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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