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हरिगीतिका छंद

शिमला शर्मा “लक्ष्मी प्रिया”
ग्वालियर (मध्यप्रदेश)

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हरिगीतिका छंद गीतिका छंद
मापनी – २२१२ २२१२, २२१२ २२१२

ब्रह्मा सुता मॉं शारदे मम, स्वर सुवासित कीजिए।
हिय भाव -पंकज हों सदा मन, प्राण भाषित कीजिए।।
संचार आशा का करो हो, दूर पीड़ा अंक से।
शुचि शिष्टता ही शीर्ष पर हों, दुष्ट दुर्जन रंक से।।

शब्दावली हो भाव भूषित, लेखनी में बास हो।
रचती रहूॅं नित छंद नूतन, मातु उर आवास हो।
द्युतिमान दे संज्ञान दे हम, मान के पालक बनें।
आए शरण में मॉं भवानी, ज्ञान के याचक बनें।।

पुष्पित सुमन अलि डोलते हैं, सुभग पीले रंग में।
आई धरा मॉं शारदे शुचि, भारती की गंग में।।
विनती करूँ कर जोड़ कर माँ, शब्द का शृंगार दे।
तेजस्विनी आभामयी मॉं, नित प्रभा संसार दे।।

पावन हृदय कमलासिनी मन, भाव निर्मल कीजिए।
आनंद हिय बरसे सदा मॉं, वेदना हर लीजिए।।
तेजस्विनी, राजेश्वरी माँ, हस्त वीणाधारिणी।
शिमला शरण मॉं आपके है, कर कृपा जग तारिणी।।

परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा “लक्ष्मी प्रिया”
निवासी : ग्वालियर (मध्यप्रदेश)
रुचि : गद्य/पद्म लेखन एवं गायन
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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