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वीर जवान

मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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खूनी होली खेलते, भारत के ये लाल।
लाल रक्त का है तिलक, चमक रहा हर भाल।।

पालो मत आतंक को, करे शांति वह भंग।
वार कराता पीठ पर, कुटिल शत्रु का ढंग।।

आग जले प्रतिशोध की, उर में मेरे राम।
नोंचे बोटी शत्रु की, करते काम तमाम।।

सूनी माँ की गोद की, आतंकी शैतान ।
रहना अब तैयार तुम, होना लहू-लुहान।।

रूठ गया सिंदूर है, चूड़ी टूटी हाथ ।
क्रूर युद्ध परिणाम है, बच्चे हुये अनाथ।।

खोलो आज त्रिनेत्र तो, दुखी शंभु संसार ।
भस्म करो अब शत्रु को, हैं धरती पर भार ।

भारत का कश्मीर है, बदलो अपने ढंग।
मृतक अनगिनत देख कर, काँप रहा है अंग।।

भारत प्राण प्रतीक है, आजादी का गान।
ध्वजा तिरंगा का करें, भारतवासी मान।।

गौरव गाथा गाइए, करते हैं कल्याण।
भारत माँ के वीर सब, तजें देश हित प्राण।।

परिचय :- मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम भट्ट
माता : स्व. सुमित्रा पाठक
पिता : स्व. हरि मोहन पाठक
पुत्र : सौरभ भट्ट
पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट
पौत्री : निहिरा, नैनिका
सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सतर्कता समिति जबलपुर की भूतपूर्व चेयरपर्सन।
प्रकाशित पुस्तक : पंचतंत्र में नारी, काव्यमेध, आहुति, सवैया संग्रह, पंख पसारे पंछी
सम्मान : विक्रमशिला हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा, विद्या सागर और साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा, विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि, गुंजन कला सदन द्वारा, महिला रत्न अलंकरण, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “उत्कृष्ट न्यायसेवा अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित तथा कई अन्य साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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