Saturday, March 14राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

ऐ जिंदगी

राजेन्द्र लाहिरी
पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
********************

ऐ जिंदगी तूने हरदम
भरपूर साथ निभाया है,
जरा फुर्सत से बैठ
और कर आकलन
मैंने क्या खोया
क्या पाया है,
अमीरी गरीबी
और घर देख
किसी को भेजना
आपके बस में नहीं,
कोई घिसट रहा
अव्यवस्था, गालियों के बीच
तो कोई खेल रहा
आनंद और सुयश में कहीं,
आपका काम तो
भरपूर वक्त देना है,
अब इंसान छांटे क्या
छोड़ना क्या लेना है,
कष्टों से भरे जहां में
कोई बचपन की खेल
व मौज मस्ती चुना,
तो कोई समय गंवाकर
अपना सिर धुना,
अभावों में भी रहकर
कोई पढ़ा आगे बढ़ गया,
ऊंचाइयां छुए और
इतिहास गढ़ गया,
तो कुछ दुर्गुणों को
अपनाते रह गए,
ताउम्र पछताते रह गए,
अपनी व्यथा मसाले
लगा सुनाते रह गए,
तो कुछ जानबूझ
जान गंवाते रह गए,
कर आज मेरा भी आकलन
आपने बचपन से
सब कुछ देखा है,
बता ऐसा क्या है जिसे
मैं अपना तो सकता था
पर हाथ में पाकर
नादानी में फेंका है,
ऐ जिंदगी बता तो जरा,
अगर भूल हुई है तो
आज उसे पहचान लूंगा,
जो राह छूट गई थी
उसे फिर से थाम लूंगा,
ऐ जिंदगी तेरे दिए हर
पल को अब सार्थक बनाऊंगा,
उतर चुकी पटरी पर लौट आऊंगा।

परिचय :-  राजेन्द्र लाहिरी
निवासी : पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर 98273 60360 पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु हमारे चलभाष क्रमांक 98273 60360 पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *