
मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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है विनय, आपसे, शारदे तार दो।
द्वार हम, हैं खड़े, शारदे प्यार दो।।
ज्ञान हो, ध्यान हो, वेद की साधना।
हम करें, नित्य ही, मातु आराधना।।
तेज हो, सूर्य सा, कर कृपा हैं शरण।
नंदिता, पूजिता, हैं गिरे हम चरण।।
मीत हो, जीत का, आप उपहार दो।
द्वार हम, हैं खड़े, शारदे प्यार दो।।
राह हम, जो चलें, सत्य का पाथ हो।
द्वेष मन, में न हो, श्रेष्ठ का साथ हो।।
हो हृदय, भी विमल, मातु भयहारिणी।
मंत्र हो, प्रेम का, हो जगततारिणी।।
कंठ पे, नाम हो, माँ अमिय धार दो।
द्वार हम, हैं खड़े, शारदे प्यार दो।।
यह धरा, देश की, मातु है पावनी।
ताज हो, सिर सदा, शांति की आसनी।।
हम सदा, हों सफल, पूर्ण हर काम हो।
ओम ही, ओम हो, माँ अमर नाम हो।।
पाप का, नाश हो, हाथ तलवार दो।
द्वार हम, हैं खड़े, शारदे प्यार दो।।
पाठ हम, तो पढ़े, मातु बस प्रीति का।
हो सृजन, आप ही, छंद हो गीतिका।।
बुद्धि दो, शुद्धि दो, हाथ माँ थामना।
सब सुखद, हो सरस, बस यही कामना।।
लेखनी, को सदा, आप विस्तार दो।
द्वार हम, हैं खड़े, शारदे प्यार दो।।
परिचय :- मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम भट्ट
माता : स्व. सुमित्रा पाठक
पिता : स्व. हरि मोहन पाठक
पुत्र : सौरभ भट्ट
पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट
पौत्री : निहिरा, नैनिका
सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सतर्कता समिति जबलपुर की भूतपूर्व चेयरपर्सन।
प्रकाशित पुस्तक : पंचतंत्र में नारी, काव्यमेध, आहुति, सवैया संग्रह, पंख पसारे पंछी
सम्मान : विक्रमशिला हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा, विद्या सागर और साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा, विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि, गुंजन कला सदन द्वारा, महिला रत्न अलंकरण, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “उत्कृष्ट न्यायसेवा अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित तथा कई अन्य साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित
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