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अंतिम तुमको मेरी पुकार

राम राज सिंह
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)

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प्रणय-गीत

अंतिम तुमको मेरी पुकार।।
नवल विटप जो पीट हो रहा उसके तुम हो प्राण।
नयन मेघ से आज करा दो अमिय प्रेम रस पान।
प्रकृति सजाती निज आँगन में नित नूतन उद्यान।
मेरे मन मधुवन में गुंजित किन्तु विरह का गान।

आज विदाई की बेला है,
द्वार खड़े है मेरे कहार।।
अंतिम तुमको मेरी पुकार।।१।।

प्रतिदिन पथ में पुष्प बिछाता साथ मधुर मुस्कान।
औचक ही मै खिल जाता हूँ तुम्हे निकट ही जान।
किन्तु मिलन वह एकाकी बस क्षण भर का अवधान।
फिर उसी वेदना के क्रंदन का होता नित्य वितान।

सुखद प्रणय की अभिलाषा में,
जीवन रण न मै जाऊ हार।
अंतिम तुमको मेरी पुकार ।।२।।

मन में है छवि बसी तुम्हारी और तुम्हारा ध्यान।
कभी तो होगा दुःख रजनी का मंगल एक विहान।
स्वाति बूँद बिनु सीप सम अधर-कमल, मुख म्लान।
आकर जीवन सुधा पिला दो बन वियोग वरदान।

प्राण हमारे पास तुम्हारे,
जाऊ फिर मै कैसे पार।।
अंतिम तुमको मेरी पुकार।।३।।

परिचय :  राम राज सिंह
निवासी : उन्नाव (उत्तर प्रदेश)
सम्प्रति : शाखा प्रबंधक (पंजाब नैशनल बैंक)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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